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  • हिंदी भवन में ‘कन्या भ्रूण हत्या क्यों’ विषय पर विशाल रागिनी कार्यक्रम, बेटियों के संरक्षण और सम्मान का संकल्प
  • राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप, सांसद अतुल गर्ग और विधायक संजीव शर्मा रहे मौजूद, संत-महात्माओं की भी रही सहभागिता
  • कलाकारों ने प्रस्तुतियों के जरिए बताई बेटियों की अहमियत, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन रविवार को कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के खिलाफ जनजागरूकता के संदेश से गूंज उठा। विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में ‘कन्या भ्रूण हत्या क्यों’ विषय पर विशाल रागिनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रागिनी कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को बेटियों के महत्व का संदेश दिया। गीतों और प्रस्तुतियों के जरिए कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों को सामने रखते हुए लोगों से बेटियों के संरक्षण, सम्मान और शिक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप, गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद अतुल गर्ग और शहर विधायक संजीव शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री महंत नारायण गिरि महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। आयोजन में वृंदावन से आए बिहारी जी के मुख्य पुजारी राहुल गोस्वामी की गरिमामयी उपस्थिति ने धार्मिक और सामाजिक संदेश को और प्रभावशाली बनाया।

कार्यक्रम की सबसे खास बात रागिनी कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों में कन्या भ्रूण हत्या के कारण समाज पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को भावनात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। रागिनी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बेटी किसी परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की शक्ति है।
कलाकारों ने बेटियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज बेटियां शिक्षा, रोजगार, खेल, प्रशासन, विज्ञान और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में उनके जन्म से पहले ही जीवन समाप्त कर देना न केवल एक गंभीर सामाजिक कुरीति है, बल्कि समाज की सोच और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है। प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को बेटियों के प्रति समानता, सम्मान और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया गया। कलाकारों ने यह भी रेखांकित किया कि परिवार और समाज में बेटियों को आगे बढऩे के समान अवसर मिलने चाहिए, तभी एक स्वस्थ और संतुलित समाज का निर्माण संभव होगा।

जन्म से लेकर शिक्षा तक बेटियों को मिले समान अवसर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संतुलन से जुड़ा गंभीर विषय है। बेटियों को जन्म लेने का अधिकार मिलने के साथ उन्हें शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर भी मिलना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी सामाजिक बुराई को केवल कानून के माध्यम से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। परिवार से लेकर समाज तक बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपील की गई कि वे अपने आसपास कन्या भ्रूण हत्या और बेटियों के प्रति भेदभाव जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं। समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से ही बेटियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

सामाजिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम का संचालन विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बीके शर्मा हनुमान ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, संत-महात्माओं, रागिनी कलाकारों और समाज के गणमान्य लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जनमानस तक सकारात्मक संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रागिनी जैसी लोक विधाओं के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को आम लोगों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए लगातार ऐसे प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

आयोजन में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, धर्माचार्य और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वातावरण में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिखाई दिया। अंत में उपस्थित लोगों ने बेटियों के सम्मान, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य के लिए सामाजिक जागरूकता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बेटियों को जन्म, शिक्षा, सम्मान और आगे बढऩे का समान अवसर देकर ही समाज को सही दिशा में आगे ले जाया जा सकता है।

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