दिल्ली पुलिस और गुरुग्राम पुलिस की भारी लापरवाही के चलते दिल्ली के सरिता विहार में रहने वाले युवराज सिंह मनचंदा के परिजनों को उसके अंतिम संस्कार करने का न तो अधिकार मिला और न ही अस्थियां।
गुरुग्राम पुलिस ने युवराज के शव लावारिस समझकर तीन दिन में पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया। दक्षिण-पूर्व जिले की पुलिस खासकर लाजपत नगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया।
दिल्ली पुलिस ने 15 अगस्त से पहले कई कोर्डिनशन मीटिंग बुलाई थी और उसमें गुरुग्राम पुलिस के अधिकारी भी शामिल हुए थे। इसके अलावा देश के पुलिस तंत्र के बीच जिपनेट सिस्टम भी है। इस पर हर राज्य व शहर की पुलिस मृतक व गायब हुए लोगों की फोटो व जानकारी अपलोड कर देती है। क्या दोनों पुलिस को जिपनेट की याद नहीं आई।
दिल्ली व गुरुग्राम के बीच की दूरी महज करीब 40 किमी है। ऐसे में दिल्ली पुलिस व गुरुग्राम पुलिस के ऊपर कई बड़े सवाल खड़े होते हैं। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस की पूछताछ पर भी सवाल खड़े होते है कि 24 घंटे कस्टडी में रखने के बावजूद आरोपियों ने युवराज की हत्या का कारण पता नहीं लगा पाई।
जिला डीसीपी विनीत कुमार ने बृहस्पतिवार देर रात बताया कि हत्या के कारणों को पता नहीं लगा है। जांच की जा रही है।
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