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Katarnia Ghat Wildlife Sanctuary Bahraich: बहराइच के कतर्नियाघाट में दुर्लभ स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का संरक्षण केंट में मीठे पानी के दुर्लभ स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का संरक्षण किया जा रहा है. अपने गहरे शेल पर सुंदर पीले-सफेद चकतों के लिए पहचाने जाने वाले इन कछूओं को सुरक्षित जालीदार बाडों में रखकर जागरूक सुचना बोर्डो के माध्यम से पर्यटकों को शिक्षित किया जाता है. पर्यटक शिक्षित होने के साथ-साथ इनको देखकर लुप्त भी उठा रहे हैं. जिनको बहराइच के के कतर्नियाघाट घाट घडियाल सेंटर में बने टैंक में रखा गया है.

बहराइच के कतर्नियाघाट में दुर्लभ स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का संरक्षण केंट में मीठे पानी के दुर्लभ स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का संरक्षण किया जा रहा है. अपने गहरे शेल पर सुंदर पीले-सफेद चकतों के लिए पहचाने जाने वाले इन कछूओं को सुरक्षित जालीदार बाडों में रखकर जागरूक सुचना बोर्डो के माध्यम से पर्यटकों को शिक्षित किया जाता है. पर्यटक शिक्षित होने के साथ-साथ इनको देखकर लुप्त भी उठा रहे हैं. जिनको बहराइच के के कतर्नियाघाट घाट घडियाल सेंटर में बने टैंक में रखा गया है.

इंडियन क्रोकोडायल का प्राकृतिक आवास भारतीय नदियों में पारिस्थिति की संतुलन बनाए रखने वाले विशाल मगरमच्छों के लिए यहाँ विशेष बेंड तैयार किए गए हैं. वन विभाग ने पर्यटकों की सरक्षा और जीवों के प्राकृतिक माहौल दोनों का संतुलन बनाकर बेहद सुरक्षित व्यवस्था की है। जिसको देखकर भी अब सैलानी खूब लुफ्त उठा रहे हैं.

वन विभाग द्वारा प्रत्येक प्रजाति के वैज्ञानिक नाम, प्राकृतिक व्यवहार और उत्पत्ति की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए गए हैं. यह पहल न केवल पर्यटन को बढावा देती है बल्कि आम जनता में वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी जागरूकता भी पैदा करती है.

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घडियालों और मगरमच्छों के स्वास्थ्य के लिए धूप सेंकना अति आवश्यक है. इसके लिए लोहे की मजबूत जालियों वाले बाडों के भीतर पर्याप्त पानी और रेतीली सूखी जमीन का एक आदर्श संयोजन तैयार किया गया है.

प्रजनन केंद्र में अंडों से निकले नन्हे घडियालों को शिकारियों और विषम परिस्थितियों से बचाने के लिए पानी के विशेष कुंडों और कंक्रीट-रेतीले पायदानों पर रखा जाता है. वयस्क और मजबूत होने के बाद इन्हें वापस प्राकृतिक नदी प्रणाली में छोड़ दिया जाता है.

शांत बहती नदियों, घनी हरी-भरी घासों और नौकायान विभान सुविधाओं के साथ कतर्नियाघाट पर्यटकों को घड़ियालों, मगरमच्छों और दुर्लभ पक्षियों को उनके प्राकृतिक प्रवास में देखने का अद्रुत अवसर प्रदान करता है.

विलुप्ति की कगार पर खड़े घड़ियालों को बचाने के लिए कर्तनियाघाट का घड़ियाल संरक्षण व प्रजनन केंद्ररढ़ की हडी साबित हो रहा है. गेरुआ और घाघरा नदियों से जुड़े क्षेत्र में नन्हे घड़ियालों को विशेष सुरक्षा दी जाती है.

इंडियन ब्लैक टर्टल कछुए से जल निकाय की होती है सफाई, मीठे पानी के सर्वाहारी इंडियन ब्लैक टर्टल जल निकायों को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं. केंद्र में इनके लिए तालाब और मिट्टी के प्राकृतिक बाडे बनाए गए हैं, जो जैव विविधता संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण हैं.

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