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बस हड़ताल के कारण बृहस्पतिवार को भी लोग बे-बस रहे और सरकार भी पस्त दिखाई दी। लोग घंटों बस स्टॉप पर इंतजार करते रहे लेकिन एक भी बस नहीं आई। इससे अधिकतर यात्री मेट्रो की ओर रूख किया और कई लोग ऑटो और कैब में अधिक किराया देकर सफर करने के लिए मजबूर दिखे। हड़ताल के कारण मेट्रो में और दिनों की अपेक्षा बहुत अधिक भीड़ रही। खासकर सुबह के समय कार्यालय पहुंचने और बच्चों को स्कूल जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। अधिक भीड़ के कारण लोग मेट्रो में भी धक्का-मुक्की करते दिखे। समय से सुविधा नहीं मिलने के कारण कई लोग काफी देरी से कार्यालय पहुंचे। इन सब परेशानियों के बीच सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग जैसे-तैसे गंतव्य तक पहुंचे।


दोपहर के समय बस स्टॉप पर यात्री खड़े रहे। कुछ देर पर बस आती दिखाई दी लेकिन बस स्टॉप पर बिना रुके आगे निकल गई। कई स्टॉप पर यात्री घंटों से बस का इंतजार कर रहे थे। नई दिल्ली के प्रमुख बस स्टॉप पर केंद्रीय टर्मिनल, राकबगंज, एनडीओपी, गुरुद्वारा बंगला साहिब, वाईएमसीए, तालकोटरा, पालिका केंद्र, शिवाजी स्टेडियम, कृषि भवन, मंडी हाउस, आईटीओ, आरएमएल बस स्टॉप पर एक भी बस नहीं दिखी। अमूमन दिन भर यात्रियों से भरे रहने वाले बस स्टॉप खाली नजर आए। जो यात्री थे भी, वो घंटों से इंतजार कर रहे थे। बस नहीं मिलने पर यात्रियों को मजबूरी में ऑटो, रैपिडो और कैब का सहारा लेना पड़ा। इन सुविधाओं में और दिनों की अपेक्षा अधिक किराया वसूल कर रहे थे। मजबूरी में लोग अधिक किराया देकर जाने को मजबूर थे। 

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