Image Slider

लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)

17 सितंबर का दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के रूप में देशभर में विशेष रूप से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं। मई 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार ने शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक कल्याण, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और विदेश नीति के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए। जून 2026 में नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की पहचान बड़े स्तर पर लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों से बनी है। प्रधानमंत्री जनधन योजना ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोडऩे का काम किया। जनधन खातों, आधार और मोबाइल के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने के तंत्र को मजबूत किया। अगस्त 2026 में इस योजना के 12 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इसके वित्तीय समावेशन पर व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया। स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता को जनअभियान बनाने का प्रयास किया। दो अक्टूबर 2014 को शुरू हुए इस अभियान के तहत शौचालय निर्माण, खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया।

इसी तरह उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की महिलाओं को रसोई में स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं तक लक्षित एलपीजी सहायता पहुंची है। मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, जल जीवन मिशन और जनऔषधि केंद्र शामिल हैं। आयुष्मान भारत के माध्यम से पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास किया गया, जबकि जनऔषधि केंद्रों के जरिये कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत के कारण लाभार्थी परिवारों को बड़े स्तर पर चिकित्सा खर्च से राहत मिली है। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया। सरकार की ओर से महिला स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी अभियान, मुद्रा ऋण और उज्ज्वला जैसी योजनाओं को भी महिला-केंद्रित विकास से जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार करीब 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। आर्थिक क्षेत्र में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू करना एक बड़ा संरचनात्मक सुधार रहा। अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों को एक साझा कर व्यवस्था में लाने का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल और अधिक एकीकृत बनाना था। डिजिटल इंडिया और यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को नई पहचान दी। आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति को वित्तीय समावेशन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले भी हुए, जिनका राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासन पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ा। अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए से संबंधित संवैधानिक बदलाव किए गए।

केंद्र सरकार ने इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास तथा संवैधानिक अधिकारों के विस्तार से जोड़ा है। 2026 में इस फैसले के सात वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता और खेल के क्षेत्रों में हुए बदलावों को रेखांकित किया। तीन तलाक के खिलाफ कानून, नागरिकता संशोधन कानून, श्रम कानूनों में सुधार और भारतीय न्याय संहिता जैसे फैसले भी मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण भी इस दौर की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में शामिल रहा। लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद के समाधान के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ और इसके बाद अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के माध्यम से देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। रक्षा उत्पादन और निर्यात में भी विस्तार हुआ है।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारतीय रक्षा उपकरण अब करीब 100 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं और रक्षा निर्यात में पहले की तुलना में कई गुना वृद्धि हुई है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, मेट्रो और रेलवे नेटवर्क के विस्तार को सरकार की प्राथमिकताओं में रखा गया। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी रेल परियोजनाओं के साथ नए हवाई मार्गों और सड़कों का विस्तार देश की संपर्क व्यवस्था को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में विदेश नीति को भी वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व मिला है। भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी जारी है, जबकि अमेरिका के साथ संबंध भी व्यापक आर्थिक और रणनीतिक हितों पर आधारित हैं। भारत ब्रिक्स, जी-20, एससीओ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

यही बहुआयामी कूटनीति भारत को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने हितों को सामने रखने का अवसर देती है। रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में सहयोग हो या अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी-भारत ने अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को अपने राष्ट्रीय हितों से जोडऩे की कोशिश की है। ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रियता भी इसी व्यापक कूटनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक छवि को लेकर समर्थकों का तर्क है कि पिछले वर्षों में भारत ने दुनिया के सामने अपनी आर्थिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और कूटनीतिक प्रभाव को अधिक मजबूती से प्रस्तुत किया है। सरकार की ओर से भारत को विश्वसनीय और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करने पर लगातार जोर दिया गया है। 2026 में प्रधानमंत्री ने भी भारत को तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की यात्रा को देखें तो एक तरफ जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत और गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं ने सीधे आम नागरिकों को केंद्र में रखा, वहीं दूसरी तरफ जीएसटी, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, बुनियादी ढांचे का विस्तार और विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों ने अर्थव्यवस्था और शासन की दिशा में बदलाव लाने का प्रयास किया। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से अधिक समय में लागू हुई नीतियों और योजनाओं की चर्चा का अवसर भी बन गया है।

समर्थकों के लिए इन योजनाओं और फैसलों में बदलते भारत की तस्वीर दिखाई देती है। वहीं वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत देती है कि आज भारत अपनी आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक क्षमता के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में पहले की तुलना में अधिक मुखर भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यही रही है कि सरकार ने विकास, कल्याण, तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैश्विक कूटनीति-इन सभी क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। भारत की विकास यात्रा अभी जारी है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य इसी दीर्घकालिक दृष्टि को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में सामने रखा गया है।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||