कोच्चि में 2023 की नीलामी आयोजित होने के बाद से बोर्ड ने लगातार विदेश का रुख किया था. इसके बाद के एडिशन की मेजबानी दुबई, जेद्दा और अबू धाबी जैसे विदेशी शहरों ने की. हालांकि, इस बार बीसीसीआई ने अपनी रणनीति बदलते हुए नीलामी को स्वदेश वापस लाने का फैसला किया है. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक मिनी-ऑक्शन होगा. हालांकि, क्रिकेट गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि इसके बाद होने वाले मेगा ऑक्शन (Mega Auction) को एक बार फिर विदेश में आयोजित किया जा सकता है.
आईपीएल ऑक्शन का आयोजन इस बार भारत में होगा.
फ्रेंचाइजी की चिंताओं पर बोर्ड की मुहर
बीसीसीआई का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कई आईपीएल फ्रेंचाइजी ने विदेशी नीलामियों को लेकर अपनी हिचकिचाहट और व्यावहारिक समस्याओं को सामने रखा था. फ्रेंचाइजी ने बोर्ड को स्पष्ट किया था कि एक छोटे मिनी-ऑक्शन के लिए अपनी पूरी टीम, सपोर्ट स्टाफ और डेलिगेशन को विदेश ले जाने में काफी ज्यादा लॉजिस्टिकल, ऑपरेशनल और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
माना जा रहा है कि अबू धाबी में हुए पिछले ऑक्शन के दौरान फ्रेंचाइजियों के मालिकों और प्रतिनिधियों ने बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी ये चिंताएं जाहिर की थीं. बोर्ड के सदस्यों ने फ्रेंचाइजियों के इस तर्क को बेहद गंभीरता से लिया और उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस साल की ऑक्शन को भारत के ही किसी शहर में आयोजित करने का निर्णय लिया.
शादियों का सीजन और 5-स्टार होटलों का गणित
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीलामी भारत के किस शहर में होगी? बीसीसीआई के सूत्रों के मुताबिक, नीलामी का वेन्यू (स्थान) तय करने के लिए सबसे बड़ी शर्त पर्याप्त और विश्वस्तरीय लॉजिंग-बोर्डिंग सुविधाओं की उपलब्धता है. अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारत में शादियों का सीजन अपने चरम पर होता है. इस वजह से देश के प्रमुख शहरों के बड़े होटलों में कमरों की भारी कमी रहती है. BCCI को इस दो-दिवसीय ऑक्शन कार्यक्रम के लिए एक ही जगह पर 100 से अधिक प्रीमियम (5-स्टार) कमरों की आवश्यकता होती है, जिसमें फ्रेंचाइजी प्रतिनिधि, बोर्ड के अधिकारी, ब्रॉडकास्टर्स और क्रू मेंबर्स ठहरते हैं. जिस भी भारतीय शहर में इन तिथियों के दौरान कमरों की पर्याप्त उपलब्धता होगी, वहीं 2027 आईपीएल नीलामी का आयोजन किया जाएगा.
इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर सस्पेंस बरकरार
नीलामी के वेन्यू के अलावा, फैंस और टीमों की नजरें जिस एक और बड़े मुद्दे पर टिकी थीं, वह था ‘इम्पैक्ट प्लेयर नियम’ (Impact Player Rule). हालांकि, गवर्निंग काउंसिल ने फिलहाल इस नियम के भविष्य पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है और इसे ओपन-एंडेड छोड़ दिया है. इस बहुचर्चित नियम पर अंतिम निर्णय लेने के लिए बीसीसीआई लगभग एक महीने के भीतर गवर्निंग काउंसिल की एक और बैठक आयोजित करेगी. इससे पहले अगस्त के अंत में बोर्ड ने सभी टीमों से इस नियम को लेकर उनकी लिखित राय और सुझाव मांगे थे.
क्या चाहते हैं फ्रेंचाइजी मालिक
ज्यादातर फ्रेंचाइजियां और कई दिग्गज खिलाड़ी इस इम्पैक्ट प्लेयर नियम के खिलाफ नजर आ रहे हैं. उनका मानना है कि यह नियम ऑलराउंडर खिलाड़ियों के विकास को नुकसान पहुंचा रहा है और खेल के पारंपरिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है. हालांकि, इसके बावजूद फ्रेंचाइजी का एक बड़ा वर्ग यह भी मानता है कि इस नियम को तुरंत हटाने के बजाय कम से कम एक और साल तक जारी रखा जाना चाहिए. टीमों का तर्क है कि उन्होंने पिछली नीलामी में अपनी वर्तमान टीम का गठन इसी ‘इम्पैक्ट प्लेयर नियम’ की रणनीतियों को ध्यान में रखकर किया था. ऐसे में अगर इसे अचानक हटा दिया जाता है, तो टीम संयोजन बिगड़ सकता है. उनका सुझाव है कि इस नियम को समाप्त करने का फैसला अगले बड़े मेगा ऑक्शन तक टाल दिया जाए ताकि सभी टीमों को नए सिरे से टीम बनाने का मौका मिल सके.
आगे की राह
बीसीसीआई के इस फैसले से जहां फ्रेंचाइजी ने राहत की सांस ली है, वहीं भारतीय फैंस के लिए भी अपने देश में आईपीएल का रोमांच करीब से देखने का रास्ता साफ हो गया है. अब सभी की निगाहें आने वाले महीने में होने वाली अगली गवर्निंग काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं, जहां इम्पैक्ट प्लेयर नियम की किस्मत का फैसला होगा और साथ ही भारत के उस शहर के नाम का भी ऐलान किया जाएगा जो 2027 की ऑक्शन की मेजबानी करेगा.
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