Image Slider

नई दिल्ली. वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही बोल्ड और विवादित सामग्री पर नकेल कसने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अब सीधी दखल दे दी है. संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा ओटीटी सामग्री को ‘नैतिक पतन’ की वजह बताए जाने के करीब दो साल बाद, संघ ने इस तथाकथित ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ से निपटने के लिए एक गोपनीय अनौपचारिक पैनल का गठन किया है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, कुछ महीने पहले गठित इस विशेष समूह ने पिछले महीने अपनी पहली अहम बैठक भी पूरी कर ली है.

इस अनौपचारिक पैनल में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ प्रचारकों के अलावा कई विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों को शामिल किया गया है. संघ सूत्रों का कहना है कि यह समूह व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगा, जिसे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार के अन्य संबंधित विभागों को सौंपा जाएगा.

परिवारों और युवाओं को बचाने के लिए सेंसरशिप की मांग
संघ का मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर जिस तरह की अनियंत्रित गंदगी परोसी जा रही है, वह भारतीय परिवारों और खासकर नई पीढ़ी के मानसिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचा रही है. पैनल का जोर इस बात पर है कि फिल्मों की तर्ज पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भी ‘सेंसर बोर्ड’ जैसी किसी सख्त नियामक संस्था का गठन अनिवार्य किया जाए.

सूत्रों ने साफ किया है कि इस अनौपचारिक समूह के लिए कोई सख्त समय-सीमा तय नहीं की गई है. सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने से पहले यह पैनल कानूनी विशेषज्ञों, जजों और संविधान के जानकारों से भी राय-मशविरा करेगा, ताकि प्रस्तावित नियमों को कानूनी पचड़ों से बचाया जा सके.

भागवत ने 12 अक्टूबर, 2024 को नागपुर में अपने सालाना विजयादशमी भाषण में OTT कंटेंट पर निशाना साधा था. RSS प्रमुख ने कहा था, “OTT प्लेटफॉर्म पर जिस तरह की चीजें दिखाई जाती हैं, वे इतनी घिनौनी होती हैं कि उनके बारे में बात करना भी अशोभनीय होगा… इसे कानून के जरिए रेगुलेट करने की जरूरत है क्योंकि यह नैतिक पतन के बड़े कारणों में से एक है.” उन्होंने समाज में कथित “विकृति” के लिए OTT प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार ठहराया था.

RSS सूत्रों ने बताया कि यह पैनल बनाने का फैसला ‘कुटुंब प्रबोधन’ से मिले फीडबैक के आधार पर लिया गया है. यह संघ की एक गतिविधि है जिसका मकसद पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को फिर से जीवित करना, पीढ़ियों के बीच रिश्तों को मज़बूत करना और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है. सूत्रों ने आगे कहा, “संघ के पदाधिकारी OTT प्लेटफॉर्म को नैतिक पतन के स्रोतों में से एक मानते हैं.”

सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्मों को ‘सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952’ के तहत सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सर्टिफिकेट लेना होता है, जिसे आम तौर पर सेंसर बोर्ड के नाम से जाना जाता है. OTT कंटेंट के लिए ऐसी कोई रेगुलेटरी बॉडी नहीं है; यह मुख्य रूप से ‘इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021’ और इससे जुड़े IT व आपराधिक कानूनों के तहत आता है. कुछ हलकों में OTT कंटेंट के लिए “रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क में कमियों” का मुद्दा बार-बार उठाया जाता रहा है.

इस साल 22 जुलाई को, सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकार ने अश्लील कंटेंट दिखाने और IT एक्ट, भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 और महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के कथित उल्लंघन के कारण पिछले दो सालों में भारत में 50 OTT प्लेटफॉर्म को पब्लिक एक्सेस के लिए बंद कर दिया है.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||