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गोंडा: जिले के वजीरगंज विकासखंड के प्रगतिशील किसान अक्षैबर सिंह ने खेती में नई तकनीक अपनाकर मिसाल कायम की है. उन्होंने एक ही खेत में बेर, विदेशी अमरूद, हल्दी और बैंगन की मिश्रित खेती शुरू की है, जिससे उन्हें एक ही भूमि से कई फसलों की आमदनी हो रही है. किसान को उम्मीद है कि इस मॉडल से खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा.

एक खेत में चार फसलों की खेती

लोकल 18 से बातचीत में किसान अक्षैबर सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 2 एकड़ जमीन में मिश्रित खेती शुरू की है. उनके खेत में बेर और विदेशी अमरूद के पौधे लगाए गए हैं. इन पौधों के बीच खाली जगह में हल्दी और बैंगन की खेती की जा रही है, जिससे खेत की पूरी जमीन का उपयोग हो रहा है. उन्होंने बताया कि अमरूद के पौधों के बीच करीब 12 फीट और बेर के पौधों के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई है. इन पौधों के बीच हल्दी और बैंगन की फसल लगाई गई है.

कम लागत में कई फसलों की तैयारी

अक्षैबर सिंह के अनुसार, मिश्रित खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही खेत में कई फसलें तैयार हो जाती हैं. सिंचाई, खाद और देखभाल का सही प्रबंधन करने से खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है. इससे किसान को अलग-अलग फसलों से आमदनी का मौका मिलता है और किसी एक फसल पर निर्भरता कम हो जाती है. उन्होंने बताया कि बैंगन में फल आने शुरू हो गए हैं और कई बार इसकी तुड़ाई भी कर चुके हैं, जिससे उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हो चुकी है. वहीं, हल्दी की फसल से भी उन्हें लागत निकालने की उम्मीद है.

बेर और अमरूद से भविष्य में अच्छी कमाई की उम्मीद

किसान ने बताया कि उनके खेत में लगे बेर के पौधों में जल्द ही फूल आना शुरू हो जाएगा. ठंड के मौसम में बेर की फसल तैयार होने पर अच्छी आमदनी की उम्मीद है. इस बार बेर की बिक्री से करीब 3 से 4 लाख रुपये तक की कमाई होने की संभावना है. अक्षैबर सिंह ने बताया कि उन्होंने खेती में करीब 90 हजार से 1 लाख रुपये तक की लागत लगाई है. उनका कहना है कि हल्दी और बैंगन की बिक्री से लागत निकलने की उम्मीद है। इसके बाद बेर और अमरूद से होने वाली कमाई उनके लिए अतिरिक्त मुनाफा होगी.

अलग-अलग किस्मों के बेर और अमरूद

किसान ने अपने खेत में मिस इंडिया बेर और बाल सुंदरी एप्पल बेर की किस्में लगाई हैं. इसके अलावा, विदेशी अमरूद की दो किस्में, गोल्डन-8 और ताइवान पिंक अमरूद, की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमरूद लंबे समय तक फल देने वाली फसल है. उचित देखभाल के साथ इससे कई वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है.। वहीं, भविष्य में बेर के पौधों को हटाकर खेत में केवल अमरूद की खेती करने की योजना है.

किसान मेले से मिला मिश्रित खेती का आइडिया

अक्षैबर सिंह को मिश्रित खेती का विचार दूसरे किसानों को देखकर और किसान मेलों में जाने से मिला. वहां खेती के नए तरीकों की जानकारी मिलती रहती है. इसके बाद उन्होंने मिश्रित खेती के बारे में जानकारी जुटाई और रिसर्च करने के बाद अपने खेत में इसकी शुरुआत की. फिलहाल वह 2 एकड़ में मिश्रित खेती कर रहे हैं और भविष्य में खेती का क्षेत्र बढ़ाने की योजना है. उनका मानना है कि किसान अगर सही योजना और जानकारी के साथ खेती करें, तो एक ही खेत से कई फसलों का उत्पादन लेकर बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.

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