team india new fasion: भारतीय क्रिकेट टीम में इन दिनों यह एक नया और चिंताजनक ‘फैशन’ बन चुका है. दिग्गज ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से लेकर मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती तक, सब इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं. यह अतिरिक्त गेंदें न केवल विरोधी टीम को मुफ्त के रन दे रही हैं, बल्कि कई बार मैच का रुख बदलने वाले महत्वपूर्ण विकेट भी भारत के हाथों से छीन रही है
टेस्ट से लेकर टी-20 तक भारतीय स्पिनर्स नो-बॉल फेंकने में सबसे आगे
भारतीय क्रिकेट टीम में इन दिनों यह एक नया और चिंताजनक ‘फैशन’ बन चुका है. दिग्गज ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से लेकर मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती तक, सब इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं. यह अतिरिक्त गेंदें न केवल विरोधी टीम को मुफ्त के रन दे रही हैं, बल्कि कई बार मैच का रुख बदलने वाले महत्वपूर्ण विकेट भी भारत के हाथों से छीन रही है.
जडेजा और वरुण के हालिया उदाहरण
इस अनचाहे चलन का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में देखने को मिला. उस टेस्ट में भारतीय स्पिनरों ने भारी लापरवाही दिखाते हुए कुल 12 नो-बॉल फेंकी. इस स्पिन आक्रमण की अगुवाई कर रहे दुनिया के नंबर-1 टेस्ट ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा खुद इस मैच में 4 बार लाइन से आगे पैर निकाल बैठे, जबकि उनके साथ अन्य स्पिनर भी इस कतार में शामिल रहे. इससे पहले गॉल टेस्ट में भी जडेजा की नो-बॉल के कारण सेट बल्लेबाज धनंजय डी सिल्वा को एक बड़ा जीवनदान मिला था, जिसने कोच गौतम गंभीर को बुरी तरह निराश कर दिया बीमारी सिर्फ रेड-बॉल क्रिकेट तक सीमित नहीं है. दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए मुकाबले में मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने भी बैक-टू-बैक लगातार 2 नो-बॉल फेंककर सबको चौंका दिया. टी-20 जैसे फॉर्मेट में स्पिनर द्वारा लगातार दो गेंदे अवैध फेंकना और उस पर फ्री-हिट देना किसी भी कप्तान के लिए एक बुरे सपने जैसा है.
2026 में भारतीय स्पिनर्स की नो-बॉल का डेटा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जब से फ्रंट-फुट नो-बॉल की निगरानी का जिम्मा पूरी तरह से थर्ड अंपायर (टेलीविजन अंपायर) को सौंपा गया है, तब से स्पिनर्स की यह कमी खुलकर सामने आने लगी है. अकेले वर्ष 2026 की बात करें तो भारतीय स्पिनर्स अलग-अलग प्रारूपों में 40 से अधिक नो-बॉल फेंक चुके हैं. 2021 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले स्पिनरों में जडेजा दुनिया में शीर्ष पर हैं. उनके नाम पिछले कुछ सालों में 89 टेस्ट नो-बॉल दर्ज हो चुकी हैं, और साल 2026 में श्रीलंका दौरे की टेस्ट सीरीज में ही उन्होंने अकेले 8 नो-बॉल फेंकी. श्रीलंका में दूसरे टेस्ट के दौरान भारत की ओर से डेब्यू करने वाले ऑफ-स्पिनर सारांश जैन ने अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय गेंद नो-बॉल फेंकी, और पूरे मैच में कुल 7 नो-बॉल डालीं.
कोच भी परेशान
स्पिन बॉलिग कोच साईराज बहुतुले ने इस समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उनका मानना है कि जब गेंदबाज विकेट निकालने के लिए अतिरिक्त प्रयास करता है, तो वह अपनी क्रीज की सीमा भूल जाता है और ओवरस्टेप कर बैठता है हालांकि बहुतुले ने मजाक में टेस्ट क्रिकेट में भी फ्री-हिट लाने का सुझाव दिया था ताकि गेंदबाज डर से नो-बॉल फेंकना बंद करें, लेकिन पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने इस विचार को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे स्पिनर्स पर टीम प्रबंधन की तरफ से जुर्मानालगाया जाना चाहिए ताकि वे अपनी अनुशासनहीनता को समझे. यदि भारतीय टीम को आगामी आईसीसी टूर्नामेंट्स और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में अपनी बादशाहत कायम रखनी है, तो नेट प्रैक्टिस के दौरान स्पिनर्स को अपने ‘टेक-ऑफ पॉइंट’ और क्रीज के अनुशासन पर कड़ी मेहनत करनी होगी अन्यथा, स्पिनर्स का यह नया ‘नो-बॉल फैशन’ टीम इंडिया को किसी बड़े नॉकआउट मैच में बहुत भारी नुकसान पहुँचा सकता है.
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राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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