सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की रहस्यमयी मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी महीने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हवाले कर दी थी. इसके साथ ही अदालत ने मामले में 6 साल तक एफआईआर दर्ज न करने पर मुंबई पुलिस की कार्यशैली की कड़ी खिंचाई भी की. बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की अब तक की जांच जवाब देने से ज्यादा गंभीर सवाल खड़े करती है. अदालत ने छह साल तक इस मौत को महज एक ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट’ (एडीआर) मानकर फाइल दबाए रखने और जांच में सामने आई बेहद चौंकाने वाली लापरवाहियों पर पुलिस को जमकर फटकार लगाई.
सीबीआई ने इन्हें बनाया आरोपी
- आदित्य ठाकरे
- रोहन रॉय
- डिनो मोरिया
- सूरज पंचोली
- आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड
- रिया चक्रवर्ती
- शोविक चक्रवर्ती
- सचिन वाजे
- परमबीर सिंह
- DCP विशाल ठाकुर
- उद्धव ठाकरे
- अनिल देशमुख
- API अशोक देवाड़े
- PI जगदेव कलापड़
- PI शैलेंद्र नगरकर
- PI चिमाजी आधव
- PI अर्जुन राजाने
- मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
- देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव
- कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser
- तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी
क्या लिखा है FIR में
आदित्य ठाकरे के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा अन्य लोगों ने भी साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भी इस बात के लिए जांच की जानी चाहिए कि क्या उन्होंने मामले से जुड़े कागजात, फाइलों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट या दबाया, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर/फर्जीवाड़ा किया और आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी धन, कर्मचारियों और पुलिस मशीनरी का गैरकानूनी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया.
FIR में कई बड़े नाम शामिल
मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, उसके बाद झूठी आत्महत्या की कहानी तैयार करने और उसे फैलाने, तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने और/या उनमें हेरफेर करने के संबंध में जिन लोगों की भूमिका की जांच की जरूरत है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव, PI अर्जुन राजाने, मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी, देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, डॉ. संजय जाधव, कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी, जिनमें N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser भी शामिल हैं, तत्कालीन संबंधित PI और अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हैं.
इसके अलावा Regent Galaxy Building के सुरक्षा गार्ड, जिनमें सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना शामिल हैं; प्रीति राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्य, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पाडवाल, सतवंत सिंह, नावेद मुजावर और प्रियेश राणे भी शामिल हैं. इसके साथ ही SIT के वरिष्ठ सदस्यों, उन सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए, जिनकी निगरानी में गलत जांच/पूछताछ की गई थी, और ऐसे अन्य अज्ञात लोगों की भी, जो अपराध और उसके बाद मामले को दबाने में शामिल रहे हों.
संदिग्ध हालात में हुई थी दिशा सालियान की मौत
8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से गिरकर दिशा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. इसके ठीक एक हफ्ते बाद 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे. दोनों मौतों के बीच के समय और कड़ियों को लेकर लंबे समय से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं. सुशांत केस में चौतरफा हंगामे के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसमें एजेंसी ने आत्महत्या करार देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी जो अभी कोर्ट में विचाराधीन है. अब बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े दखल के बाद दिशा सालियान केस में बंद फाइलों के फिर से खुलने और कई बड़े चेहरों की धड़कनें तेज होने की संभावना बढ़ गई है.
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