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होमखेलक्रिकेट नकवी ने ACC के गाइडलाइन को मारा लात, ट्रॉफी देने को लेकर क्या कहते है नियम?

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acc law on trophy : क्रिकेट प्रशासकों और बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की पुरानी गाइडलाइन और परंपराओं में यह स्पष्ट रहा है कि बड़े आयोजनों या द्विपक्षीय सीरीज में पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान विजेता टीम को ट्रॉफी देने का सम्मान न्यूट्रल पदाधिकारियों, स्थानीय क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों या मेजबान देश के बोर्ड अध्यक्ष को दिया जाता है

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ACC की गाइडलाइन और नियमों को ताक पर रख चुके है मोहसिन नकवी

नई दिल्ली. जब जिद जुनून बन जाए और पागलपन सारी सीमाएं लांघ जाए तो फिर ना तो नियमों की परवाह होती है और ना ही किसी बात का डर. कुछ ऐसे ही दौर से गुजर रहे है पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारी मोहसिन नकवी. लगातार दूसरी बार ट्रॉफी देने को लेकर बवाल करने वाले मोहसिन नकवी ने एसीसी के नियमों की किताब को तार-तार करते हुए खिलाड़ियों से उनका हक छीन लिया. ये सब कुछ हुआ या यू कहें रिपीट हुआ दुबई के स्टेडियम पर जहां वो ट्रॉफी लेकर चलते बने.

दुबई में खेले गए विमेन्स एशिया कप के फाइनल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को शिकस्त देकर एक बार फिर ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के बाद मैदान पर जो खेल राजनीति का दिखा, उसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया. क्रिकेट के इतिहास में ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि चैंपियन टीम अपनी चमचमाती ट्रॉफी उठाए बिना ही मैदान से लौट जाए. दरअसल, भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद नकवी बिना किसी आधिकारिक हैंडओवर के ट्रॉफी को लेकर चले गए. 12 महीनों के भीतर यह दूसरी बार है जब भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से परहेज किया है. इस पूरे ड्रामे के केंद्र में हैं मोहसिन नकवी, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी जिद के आगे क्रिकेट की मर्यादा और ACC के नियमों की अनदेखी की है.

क्या कहती है ACC की गाइडलाइन और परंपरा?

क्रिकेट प्रशासकों और बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की पुरानी गाइडलाइन और परंपराओं में यह स्पष्ट रहा है कि बड़े आयोजनों या द्विपक्षीय सीरीज में पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान विजेता टीम को ट्रॉफी देने का सम्मान न्यूट्रल पदाधिकारियों, स्थानीय क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों या मेजबान देश के बोर्ड अध्यक्ष को दिया जाता है. यह प्रोटोकॉल खेल भावना को बनाए रखने और राजनीतिक गतिरोध को मैदान से दूर रखने के लिए बनाया गया है. परंतु, जब से मोहसिन नकवी ने ACC अध्यक्ष का पद संभाला है, उन्होंने खेल के नियमों और इस गरिमापूर्ण परंपरा को अपनी व्यक्तिगत जिद में बदल दिया है. एशियन क्रिकेट काउंसिल को वो अपना घऱ और ट्रॉफी पर अपना अधिकार समझने लगे है.

विवाद की असल वजह

मोहसिन नकवी का दोहरा रवैयाबीसीसीआई सचिव और अन्य पदाधिकारियों ने साफ किया था कि भारत किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनेगा. मोहसिन नकवी केवल क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान सरकार के वर्तमान गृह मंत्री भी हैं. बोर्ड ने मैच शुरू होने से पहले ही एसीसी अधिकारियों को आगाह कर दिया था कि अगर नकवी प्रेजेंटेशन सेरेमनी में आते हैं, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. भारत ने सुझाव दिया था कि उनकी जगह एसीसी के उपाध्यक्ष या अमीरात क्रिकेट बोर्ड का कोई पदाधिकारी ट्रॉफी सौंपे. इसके बावजूद, नकवी अपनी जिद के चलते खुद मंच पर डटे रहे. जब भारतीय महिला टीम मंच पर नहीं आई, तो नकवी ने किसी अन्य न्यूट्रल अधिकारी को जिम्मेदारी देने के बजाय उपविजेता श्रीलंका को चेक थमाया और सेरेमनी को अचानक खत्म कर दिया. इसके बाद वे विजेता ट्रॉफी और मेडल्स को अपने साथ ले गए, जो कि पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना रवैया है.

क्या नकवी की ज़िद जायज़ है?

एक खेल संगठन के मुखिया के तौर पर मोहसिन नकवी की यह जिद किसी भी नजरिए से जायज नहीं ठहराई जा सकती. किसी भी टूर्नामेंट का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों की मेहनत का सम्मान करना होता है. नकवी के इस अड़ियल रुख की वजह से चैंपियंस को उनकी हक की ट्रॉफी के साथ जश्न मनाने का मौका नहीं मिला. नकवी का यह कहना कि ‘अगर भारत को ट्रॉफी चाहिए, तो भारतीय कप्तान खुद दुबई आकर उनके दफ्तर से इसे कलेक्ट करें’, उनकी खेल-विरोधी मानसिकता और अहंकार को दर्शाता है. क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि नकवी ने न सिर्फ एसीसी के प्रोटोकॉल को ताक पर रखा बल्कि खेल को राजनीति का अखाड़ा बना दिया. भारतीय टीम के कोच ने भी स्पष्ट किया कि टीम पूरी तरह से बोर्ड के इस फैसले के साथ खड़ी है, क्योंकि खिलाड़ियों के लिए मैदान पर खेल का प्रदर्शन और उनकी जीत ही असली ट्रॉफी है, किसी अहंकारी अधिकारी के हाथ से लिया गया कोई कप नहीं.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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