रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को आगरा में आयोजित ‘खटिक समाज गर्जना सम्मेलन’ में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, “जब समाज में समरसता बढ़ेगी, तब ही शांति बढ़ेगी. जब समाज में शांति बढ़ेगी, तब ही समृद्धि बढ़ेगी. जब समृद्धि बढ़ेगी, तब ही विकास और प्रगति के कार्य और तेज गति से आगे बढ़ेंगे और हमारा देश विकसित देश बनेगा. आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार अंत्योदय और सर्वोदय के भावना के साथ काम कर रही है. सर्वोदय यानी समाज में सभी लोगों का उत्थान होना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश यह है कि पैसों के अभाव किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके. अवसर के अभाव के कारण कोई युवा पीछे न रहे और हर व्यक्ति शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़े. राजनाथ सिंह ने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने की घोषणा की है.
उन्होंने बताया कि आज देशभर में हमारी सरकार, विकास की मुख्यधारा में पीछे रह गए लोगों को, समान अवसर देने के लिए काम कर रही है. जैसे बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है. उच्च शिक्षा और विदेश में पढ़ाई के लिए भी आर्थिक मदद की जा रही है. आज, बाबासाहेब अंबेडकर के मंत्र ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो’ को याद करने की जरूरत है. डॉ. अंबेडकर ने दुनिया के सबसे अच्छे विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने संघर्ष का मार्ग चुना.
साथ ही राजनाथ सिंह ने कहा, “आगरा के पेठे को कौन भूल सकता है. आगरा का पेठा अपनी मिठास के लिए मशहूर है. ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना के तहत आगरा के पेठे को पूरी दुनिया में पहचान मिली है और विदेशों में भी लोग इसके स्वाद का लुत्फ उठा रहे हैं. आज उत्तर प्रदेश भी, डबल इंजन की सरकार के साथ, तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है. आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था. ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं. असुरक्षा का माहौल था. लोग भय में जी रहे थे. हर दिन दंगे होते थे.”
वहीं, खटीक समाज पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं का निशाना बनाना शुरू किया गया, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटिक जाति के बहुत से लोगों ने मोर्चा संभाला था और हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था. 1857 में, जब मेरठ में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ी गई तब खटिक समाज के लोगों ने बहुत वीरता से अंग्रेजों का मुकाबला किया था. अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में खटीकों का बहुत उत्पीड़न किया. लेकिन खटीकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व दिया.”
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