Image Slider

Last Updated:

Jalore News: स्वर्णगिरी और कंचनगिरी पहाड़ियों के बीच बसा जबालीपुर गांव अपने पौराणिक इतिहास के लिए खास माना जाता है. गांव की कहानी रामायण काल के महर्षि जबाली से जुड़ी बताई जाती है. मान्यता है कि महर्षि जबाली ने यहां तपस्या की थी और यह स्थान उनकी तपोभूमि रहा. प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक महत्व से जुड़ा यह गांव आज भी स्थानीय लोगों के लिए आस्था और इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

ख़बरें फटाफट

जालोर: जालौर की स्वर्णगिरी और कंचनगिरी पहाड़ियों के बीच बसा है जबालीपुर गांव. चारों तरफ पथरीली पहाड़ियां, जंगल और हरियाली इस गांव के वातावरण को खास बनाते हैं. शहर की भीड़भाड़ से दूर यहां आज भी ग्रामीण जीवन की सादगी देखने को मिलती है. गांव की गलियों से गुजरते हुए आसपास की पहाड़ियां और प्राकृतिक नजारे इसकी अलग पहचान बनाते हैं. यही वह क्षेत्र है, जिसे स्थानीय लोग महर्षि जबाली की तपोभूमि कहते हैं.

अगर जबालीपुर गांव की बात करें तो यहां करीब 304 परिवार निवास करते हैं. यहां रहने वाले ज्यादातर परिवार निम्न और मध्यम वर्ग से आते हैं. पहाड़ी और पथरीला इलाका होने की वजह से गांव में खेती-बाड़ी के लिए जमीन सीमित है. ऐसे में यहां के कई परिवार मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं.

पहाड़ों के बीच सीमित खेती
जबालीपुर के आसपास के इलाकों में खेती भी की जाती है. यहां पानी के अच्छे स्रोत होने और मीठा पानी उपलब्ध होने की वजह से खेती को सहारा मिलता है. आसपास के खेतों में मूंग, बाजरा, अनार और अरंडी जैसी फसलें प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं. बारिश और पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती का स्वरूप भी बदलता रहता है. पहाड़ियों और जंगलों के बीच बसे इस इलाके में खेती और मजदूरी, दोनों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं.

धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल
जबालीपुर की पहचान सिर्फ इसकी पहाड़ियों और ग्रामीण जीवन तक सीमित नहीं है. इस क्षेत्र में कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं. यहां प्राचीन जनेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इसके अलावा लव-कुश वाटिका और एक प्राचीन दरगाह भी बनी हुई है. जिससे एक ही इलाके में अलग-अलग धार्मिक स्थलों के साथ प्रकृति और पुरानी मान्यताओं का जुड़ाव देखने को मिलता है. स्थानीय निवासी श्यामलाल ने लोकल 18 को बताया कि यह एक प्राचीन जगह है. मान्यता है कि रामायण काल के ऋषि जबाली ने यहां के जंगलों में तपस्या की थी. जबाली ऋषि अयोध्या के ब्राह्मण थे.

महर्षि जबाली की तपस्या से जुड़ा हुआ माना जाता
भगवान राम के वनवास के समय वे उनके भ्राता भरत के साथ भगवान राम से मिलने भी गए थे. आज भी स्वर्णगिरी और कंचनगिरी के बीच जबालीपुर गांव बसा हुआ है. यहां जनेश्वर महादेव मंदिर, लव-कुश वाटिका और प्राचीन दरगाह भी है. इस पूरे क्षेत्र का इतिहास महर्षि जबाली की तपस्या से जुड़ा हुआ माना जाता है. आज जबालीपुर में समय बदल गया है, लेकिन पहाड़ियों, जंगलों और यहां की पुरानी मान्यताओं के बीच महर्षि जबाली की तपस्या की कहानी आज भी लोगों को उनकी याद दिलाती है.

About the Author

authorimg

Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||