अब सामने आई जानकारी से इस सवाल का जवाब काफी हद तक मिलता है. वैसे भारत सरकार को पता थी कि शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में आएंगे. भले ही यह बात पब्लिक नहीं थी, मगर पर्दे के पीछे सबकुछ तय हो रहा था. जी हां, चीन ने शी जिनपिंग के भारत आने की जानकारी भारत को कई सप्ताह पहले ही दे दी थी. इतना ही नहीं, जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर 27 अगस्त को बीजिंग में एक अहम कदम भी उठाया गया था.
27 अगस्त को बीजिंग में क्या हुआ?
टीओआई की खबर के मुताबिक, 27 अगस्त को चीन ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से शी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल के लिए वीजा जारी करने का आधिकारिक अनुरोध किया था. यानी उस समय तक चीन के स्तर पर भारत दौरे की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. इसलिए यह कहना कतई सही नहीं होगा कि चीन ने अचानक आखिरी समय में भारत दौरे का फैसला किया.
फिर यात्रा की घोषणा में देरी क्यों हुई?
हां यह बात जरूर है कि शी जिनपिंग की यात्रा की घोषणा में देरी जरूर हुई. इसी ने कई सवालों को जन्म दे दिया कि क्या चीन माइंडगेम खेल रहा है? मगर हकीकत यह है कि चीन ने भारत को पहले ही बता दिया था कि शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली की यात्रा करेंगे. इसका मतलब यह है कि घोषणा में देरी और दौरे की तैयारी में देरी, दोनों अलग-अलग बातें हैं. पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच यात्रा को लेकर तैयारी चल रही थी. 27 अगस्त को वीजा के लिए किया गया औपचारिक अनुरोध इसका एक अहम संकेत है.
कब होगी जिनपिंग-मोदी की मुलाकात
गौरतलह है कि शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आज यानी आधी रात के बाद भारत आएंगे. इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शनिवार को द्विपक्षीय बैठक होने की भी संभावना है. यह बैठक ब्रिक्स के बहुपक्षवाद से जुड़े बंद सत्र और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शाम 7:30 बजे आयोजित रात्रिभोज के बीच हो सकती है. शी जिनपिंग इस डिनर में भी शामिल होंगे.
मोदी-शी मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी बात?
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं होगी. दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ समय में धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़े हैं. ऐसे में यह बैठक आगे की राह तय करने के लिए अहम हो सकती है. वैसे भी शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं. आखिरी बार वह 2019 में भारत आए थे. उसके बाद गलवान हिंसा ने दोनों देशों में तकरार पैदा कर दी. बहरहाल, मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में भारत की ओर से बाजार तक उचित पहुंच, भरोसेमंद सप्लाई चेन और दोनों देशों के बीच व्यापार में संतुलन जैसे मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद है. साथ ही सीमा शांति भी अहम मुद्दा होगा.
2020 के लद्दाख विवाद के बाद बदले रिश्ते
भारत और चीन के रिश्तों में सबसे बड़ा तनाव 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद आया था. दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रहीं. इसके बाद धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई. 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने रिश्तों में सुधार की नई शुरुआत की. कजान बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने उच्चस्तरीय बातचीत फिर शुरू करने पर सहमति जताई. सीमा विवाद से जुड़े मामलों को देखने के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों को सक्रिय किया गया.
पिछले साल भी चीन गए थे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल एससीओ यानी शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन गए थे. वहां उनकी शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई थी. इस मुलाकात से भी भारत-चीन रिश्तों में आई नरमी को बल मिला था. दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत और चीन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं. अब शी जिनपिंग का भारत दौरा इस सुधार को आगे बढ़ाने का मौका दे सकता है.
चीन के लिए भी क्यों अहम है शी का भारत दौरा?
शी जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से ही अहम नहीं है. इसका ब्रिक्स के स्तर पर भी बड़ा महत्व है. अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को मिलेगी. यानी भारत के बाद चीन इस समूह की जिम्मेदारी संभालेगा. ऐसे में भारत में ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग की मौजूदगी चीन के लिए अहम मानी जा रही है. खास बात यह भी है कि शी जिनपिंग पिछले साल ब्राजील में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने नहीं गए थे. ऐसे में इस बार भारत आना और प्रधानमंत्री मोदी से आमने-सामने बातचीत करना दोनों देशों के साथ-साथ BRICS की राजनीति के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है.
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