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  • बीआरआईसीएस महिला विकास सम्मेलन में भारत समेत चार देशों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
  • ग्रामीण और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की महिलाओं तक बेहतर इलाज पहुंचाने पर हुआ मंथन
  • डिजिटल स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दूरस्थ चिकित्सा सेवाओं के बेहतर इस्तेमाल पर जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। यशोदा समूह अस्पताल की प्रबंध निदेशक और बीआरआईसीएस महिला व्यापार गठबंधन के स्वास्थ्य सेवा कार्य समूह की प्रमुख डॉ. उपासना अरोड़ा ने नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित बीआरआईसीएस महिला-नेतृत्व विकास सम्मेलन 2026 में महिला स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर उच्चस्तरीय परिचर्चा का नेतृत्व और संचालन किया। सम्मेलन में भारत सहित ईरान, रूस और ब्राजील के महिला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। परिचर्चा में महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ जोडऩे की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ‘महिला स्वास्थ्य के लिए नवाचार : प्राथमिक उपचार, तकनीक और पहुंच के बीच सेतु’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में विशेष रूप से ग्रामीण और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में महिलाओं को समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और समय पर उपचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर महिलाओं के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। परिचर्चा के दौरान बीमारी की शुरुआती पहचान और जांच में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, दूरस्थ चिकित्सा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही मातृ स्वास्थ्य, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और मरीजों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा उपचार के बाद लगातार निगरानी की जरूरत को भी महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों का कहना था कि तकनीक को केवल सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि केवल आधुनिक तकनीक के सहारे महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और प्रभावी देखभाल व्यवस्था की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को बीमारी के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच कराने, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने, उपचार जारी रखने और स्वास्थ्य लाभ के बाद नियमित निगरानी तक लगातार देखभाल की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यशोदा समूह अस्पताल में भी यह अनुभव सामने आया है कि समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख और नियमित स्वास्थ्य निगरानी से मरीजों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है। विशेष रूप से ऐसे मरीजों के लिए समन्वित स्वास्थ्य सेवा जरूरी है, जिन्हें उपचार के अलग-अलग चरणों में विभिन्न विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। तकनीक ऐसे मरीजों और चिकित्सकों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। डॉ. अरोड़ा ने जोर दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक, चिकित्सक और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

इससे महिलाओं को उनकी भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना समय पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तभी प्रभावी होगा, जब उसके साथ मानवीय देखभाल और मजबूत स्वास्थ्य ढांचा भी मौजूद हो। सम्मेलन की परिचर्चा में भारत, ईरान, रूस और ब्राजील से महिला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और अनुभवों को साझा किया। अलग-अलग देशों के अनुभवों के आदान-प्रदान से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता सामने आई। बीआरआईसीएस महिला व्यापार गठबंधन के स्वास्थ्य सेवा कार्य समूह का उद्देश्य महिलाओं के लिए बेहतर प्राथमिक और बचाव आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में डॉ. अरोड़ा की भागीदारी ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उनके नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका को और मजबूत किया। इस अवसर पर यशोदा समूह अस्पताल का प्रतिनिधित्व भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुआ। बीआरआईसीएस महिला व्यापार गठबंधन की स्थापना वर्ष 2020 में सदस्य देशों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। स्वास्थ्य सेवा इसके प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में शामिल है। जनवरी 2026 में भारत ने इस गठबंधन की अध्यक्षता संभाली। सम्मेलन में महिला नेतृत्व, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी नवाचार के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

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