Last Updated:
Ranjit Singh Story: सोचिए गुलाम भारत का कोई रहवासी कैसे इंग्लैंड जाकर उन्हीं की टीम से खेलने लगता है जबकि कई अंग्रेज इसके खिलाफ थे. यहां तक कि क्रिकेट की बाइबल कही जाने वाली मैग्जीन विजडन ने भी रणजीत सिंह के टैलेंट का लोहा मानते हुए उन्हें 1897 में क्रिकेट ऑफ द ईयर से सम्मानित किया था.
भारत के पहले इंटरनेशनल क्रिकेटर महाराजा रणजीतसिंहजी का आज जन्मदिन है.
रणजीत सिंह का आज जन्मदिन है
आजादी से पहले हिन्दुस्तान में क्रिकेट सिर्फ राजघरानों, नवाबों और रईसों तक ही सीमित था. इन्हीं में एक थे जामनगर के महाराजा कुमार रणजीतसिंह. रणजीतसिंह का आज बर्थडे है. अगर आज वह जिंदा होते तो अपना 154वां जन्मदिन मना रहे होते. रणजीत सिंह का जन्म 10 सितंबर 1872 को गुजराज के काठियावाड़ के सरोदर गांव में हुआ.
इंग्लैंड पढ़ने गए और क्रिकेटर बनकर लौटे
शाही परिवारों के बच्चों को पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेजना तब एक परम्परा का हिस्सा था. रणजीत सिंह भी 16 साल की उम्र में इंग्लैंड चले गए. पढ़ाई के दौरान ही स्कूल और फिर कॉलेज में क्रिकेट खेलने लगे. माता-पिता ने भले ही अपने बेटे का नाम रणजीतसिंह रखा हो, लेकिन इंग्लैंड में उन्हें निकनेम मिला ‘रणजी और स्मिथ’. रणजीत ने अपने क्रिकेट करियर का पहला मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफ्फोर्ड मैदान पर खेला.
गुलाम भारतीय इंग्लैंड टीम से कैसे खेला?
रणजीतसिंह भले ही भारतीय हो, लेकिन फिर भी 1896 में उन्हें इंग्लैंड ने अपनी टीम में शामिल किया. वह इंग्लैंड की टीम से खेलने वाले एशियाई मूल के पहले क्रिकेटर थे. उनके सिलेक्शन पर जमकर विवाद भी हुआ था. MCC के चेयरमैन लार्ड हारिस का कहना था कि रणजीत भले ही रॉयल फैमिली से हो, लेकिन हैं तो हमारे गुलाम ही. उनका इंग्लैंड टीम में कैसे सिलेक्शन हो गया और हम (अंग्रेज) किसी ‘काले’ के लिए फील्डिंग क्यों करेंगे? मगर रणजीतसिंह ने अपने सिलेक्शन को सही साबित करते हुए डेब्यू टेस्टमें ही 62 और 154* रन की दो लाजवाब पारियां खेल डालीं. वह ऐसे पहले क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपने पहले टेस्ट मैच में पहली पारी में अर्धशतक और दूसरे पारी में शतक बनाया.
रणजी के लिए आपस में ही भिड़ गए अंग्रेज
अगले ही साल यानी 1897 में जब इंग्लैंड टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा हुआ. रणजीतसिंह को सिडनी में हुए पहले टेस्ट में सातवें नंबर पर बैटिंग का मौका मिला. इतने नीचे आकर भी उन्होंने 175 रन ठोक डाले. आपको जानकर हैरानी होगी कि मैच से पहले वह बीमार थे और कमजोरी महसूस कर रहे थे, लेकिन इंग्लैंड की टीम उन्हें टीम से बाहर नहीं रखना चाहती थी. रणजी ने अपने 15 टेस्ट मैच के करियर में 44.95 की एवरेज से 989 रन बनाए. 307 प्रथम श्रेणी मैच में 72 शतक और 109 अर्धशतक का रिकॉर्ड भी रणजी के नाम दर्ज है.
60 साल की उम्र में जामनगर में हुआ निधन
1904 में रणजीत भारत वापस आ गए. 1907 में नवानगर के महाराजा बने. 2 अप्रैल 1933 को 60 साल की उम्र में रणजीतसिंह का जामनगर में निधन हो गया. 1934 में रणजीत के नाम पर भारत ने रणजी ट्रॉफी शुरू हुई. 1897 में रणजी ने ‘द जुबली बुक ऑफ क्रिकेट’ लिखी, जिसे आम तौर पर क्रिकेट की बेहतरीन किताबों में से एक माना जाता है, उनके भतीजे दलीप सिंह भी इंग्लैंड की तरफ से टेस्ट मैच खेले थे, जिनके नाम पर देश में दलीप ट्रॉफी खेला जाता है.
About the Author
अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…
और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



