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लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राज्य के बड़े राजनीतिक घरानों और सोशल मीडिया से उभरी प्रभावशाली महिलाओं ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. मोदी सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को टिकट देने की होड़ मची है. यूपी में 2027 का चुनाव सिर्फ पुराने दिग्गजों के बीच की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि इसमें पारिवारिक विरासत और सोशल मीडिया के प्रभाव का भी असर दिखेगा. इस बार यूपी के चुनावी मैदान में 5 बड़े और नए महिला चेहरे उतर सकते हैं, जिनकी दावेदारी ने अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. इनमें देश के 2 पूर्व प्रधानमंत्रियों की बहुएं और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी शामिल हैं. बृजभूषण सिंह हाल ही में यौन शोषण के आरोपों से बरी हुए हैं. सिंह के दोनों बेटे एमपी और एमएलए हैं और अब बेटी शालिनी सिंह भी विधायक बनने के लिए बेताब हैं.

चारू चौधरी

बात करते हैं सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की. देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पोत्रवधू और मोदी सरकार में मंत्री जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी चुनाव लड़ सकती हैं. आरएलडी चारू को सहारनपुर, बागपत या मथुरा के किसी सीट से मैदान में उतार सकती है. चारू चौधरी लंबे समय से रालोद के महिला पंख और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रही हैं. हाल ही में सहारनपुर में एनडीए की स्वाभिमान रैली में उन्होंने सीएम योगी की मौजूदगी में खुले मंच से जनता को संबोधित कर सीधे सियासी पारी खेलने का संकेत दिया था.

डॉ सुषमा शेखर

इसी तरह देश के एक और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर भी चुनावी तैयारी शुरू कर दी हैं. सुषमा शेखर बीजेपी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी हैं. डॉ सुषमा शेखर बलिया सदर या फेफना सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. खास बात यह है कि बीते लोकसभा चुनाव में बलिया से डॉ नीरज शेखर की हार हुई थी. इसके बाद से ही डॉ सुषमा शेखर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं. डॉ सुषमा शेखर बलिया के स्थानीय कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क में काफी सक्रिय हैं. उन्होंने 2027 के चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं.

शालिनी सिंह

हाल ही में यौन शोषण के आरोप से बरी हुए बीजेपी के बाहुबली पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी चुनावी मैदान में उतरने के लिए बेताब हैं. बीते एक-दो सालों से वह नोएडा में काफी सक्रिय रह रही हैं. वह पेशे से एक कवियत्री हैं. खास बात यह है कि वह संघ की महिला शाखा ‘राष्ट्र सेविका समिति’ से तृतीय वर्ष प्रशिक्षित हैं. शालिनी सिंह गौतम बुद्ध नगर जिले की किसी सीट या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी अन्य प्रमुख सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. शालिनी सिंह पिछले 15 सालों से नोएडा में सामाजिक रूप से सक्रिय हैं और हाल ही में उन्होंने मीडिया में साफ कहा है कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कहेगा तो वे 2027 का चुनाव जरूर लड़ेंगी.

शालिनी सिंह ने सवाल उठाए.

ऋचा सिंह

इसके साथ ही कभी सपा की चर्चित छात्र नेता रहीं ऋचा सिंह भी प्रयागराज के किसी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. ऋचा सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पहली महिला अध्यक्ष का चुनाव जीती थीं. चर्चा चल रही है कि वह प्रयागराज शहर की पश्चिमी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. बीते कुछ सालों से जमीनी आंदोलनों और मुखर शैली के लिए पहचानी जाने वाली ऋचा सिंह लगातार प्रयागराज में जनसमस्याओं को लेकर पदयात्राएं कर रही हैं और 2027 के लिए जनता के बीच पकड़ मजबूत कर रही हैं.

तनुश्री त्रिपाठी

इन नामों के अलावा पूर्व बाहुबली मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री त्रिपाठी भी मैदान में उतर सकती हैं. तान्या पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी की बहन हैं. परिवार के कानूनी और राजनीतिक मामलों को संभालने के बाद तान्या अब सीधे जनता के बीच सक्रिय हैं. वे नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में चौपालों और सामाजिक आयोजनों के जरिए पहली बार चुनावी दावेदारी ठोक रही हैं.

अमन पटेल

सोनेलाल पटेल के परिवार की सबसे छोटी बेटी और अनुप्रिया पटेल व पल्लवी पटेल की बहन अमन भी इस बार चुनावी समर में कूद सकती हैं. प्रतापगढ़ या मिर्जापुर जिले की किसी प्रमुख ओबीसी बहुल सीट से वह मैदान में उतरेंगी. अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की विरासत को लेकर पटेल परिवार में मचे घमासान के बीच अमन पटेल सामाजिक कार्यक्रमों और कुर्मी वोट बैंक के बीच अपनी पैठ बना रही हैं. वे 2027 में पहली बार राजनीतिक दांव खेलने जा रही हैं. साल 2023 में अमन पटेल की शादी हुई थी. इस शादी में पीएम मोदी भी पहुंचे थे.

साल 2023 में पीएम मोदी भी अमन पटेल की शादी में पहुंचे थे.

पूर्वांचल से लेकर पश्चिमि यूपी तक ये 5 नई और प्रभावशाली महिलाएं आने वाले दिनों चुनावी समर में कूद जाएं तो हैरान नहीं होइएगा. ये महिलाएं ऐसी हैं जो इससे पहले कभी खुद चुनाव नहीं लड़ी हैं, लेकिन 2027 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरने की पुरजोर तैयारी कर रही हैं. उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर महिला वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. यही वजह है कि जहां एक तरफ मुख्य राजनीतिक दल लोकलुभावन वादों से आधी आबादी को लुभा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इन 5 नए पढ़े-लिखे, प्रभावशाली और पारिवारिक बैकग्राउंड वाले महिला चेहरों की उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं.

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