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माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
Published by: Akash Dubey

Updated Sun, 06 Sep 2026 11:03 PM IST

जिले में साढ़े तीन हजार से अधिक जर्जर भवनों में लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। विकास एजेंसियां केवल नोटिस दे रही हैं, जबकि लोग वैकल्पिक आवास के बिना खाली करने को तैयार नहीं।


People living in 3500 dilapidated buildings in Ghaziabad

जर्जर भवन
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

दिल्ली में जर्जर भवन के जमींदोज होने जैसा हादसा यहां भी हो सकता है। जिले में साढ़े तीन हजार से ज्यादा भवनों के जर्जर घोषित होने के बाद भी उनमें लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। दिलचस्प यह है कि विकास एजेंसियों की ओर से केवल नोटिस देने तक की कार्रवाई की जा रही है।


करीब 35 साल पहले राजेंद्र नगर क्षेत्र में जीडीए ने तुलसी निकेतन योजना विकसित की थी। 7.83 हेक्टेयर भूमि पर तुलसी निकेतन योजना विकसित की गई। इसमें 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी सहित कुल 2,292 फ्लैट बनाए गए थे। साथ ही 60 दुकानें भी आवंटित की गईं। वर्तमान में यहां 20 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। पिछले चार साल पहले जर्जर हो चुके इनके भवनों में छज्जा गिरने से हादसे होने के बाद जीडीए ने दो साल पहले इन्हें जर्जर घोषित कर दिया और लोगों को आवास खाली करने के लिए नोटिस भेज दिए। लोगों के विरोध के बाद इस योजना को तोड़कर नए सिरे से इसके निर्माण की योजना बनाई गई।

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