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  • प्रेम, भक्ति और सदाचार का संदेश देता है श्रीकृष्ण का जीवन: पूनम गौतम
  • संस्कृति से जुड़ाव बच्चों के व्यक्तित्व को देता है नई पहचान: तनुजा
  • कृष्ण की बाल लीलाओं से सजी झांकियों ने बांधा समां, दही हांडी ने बढ़ाया जन्माष्टमी का उल्लास
  • बांसुरी, मुकुट, पालना और मटकी सजाकर बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, गूंजा जय श्रीकृष्ण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। प्रताप विहार स्थित गौतम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व उत्साह, उमंग और भक्तिमय वातावरण के बीच मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों ने धार्मिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पूरा विद्यालय कृष्णमय नजर आया। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी राधा-कृष्ण के आकर्षक रूप में सजे दिखाई दिए, वहीं भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियों और दही हांडी की प्रस्तुति ने समारोह में चार चांद लगा दिए। जन्माष्टमी समारोह के दौरान विद्यार्थियों के लिए फ्लूट मेकिंग, क्रैडल मेकिंग, कृष्ण क्राउन मेकिंग और पॉट डेकोरेशन जैसी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और हुनर का परिचय देते हुए सुंदर बांसुरी, पालने, मुकुट और मटकियां तैयार कीं। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल पर्व से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोडऩा भी रहा। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में हिस्सा लिया और अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

समारोह का मुख्य आकर्षण नन्हे राधा-कृष्ण बने विद्यार्थी रहे। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया। किसी बच्चे के हाथ में बांसुरी नजर आई तो कोई मुकुट और मोरपंख लगाए कान्हा के रूप में आकर्षण का केंद्र बना रहा। राधा के रूप में सजी छात्राओं ने भी अपनी मनमोहक वेशभूषा और प्रस्तुति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विद्यालय परिसर में बच्चों की आकर्षक वेशभूषा देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वृंदावन की झलक विद्यालय में उतर आई हो। विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर आधारित मनमोहक झांकियां भी प्रस्तुत कीं। झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिकाएं निभाईं। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित शिक्षकों और अन्य विद्यार्थियों की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों और श्रीकृष्ण के जयकारों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।

दही हांडी समारोह का एक और प्रमुख आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ दही हांडी की प्रस्तुति दी। इस दौरान बच्चों ने टीम भावना और खेल भावना का परिचय देते हुए भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की झलक प्रस्तुत की। दही हांडी के आयोजन ने बच्चों में उत्साह भर दिया और समारोह में मौजूद सभी लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर सत्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढऩा चाहिए। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। विद्यालय के निदेशक आशीष गौतम ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और सकारात्मक सोच बनाए रखने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर अनुशासन और कर्तव्य के साथ आगे बढऩा चाहिए।

उपप्रधानाचार्या तनुजा ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की रचनात्मकता, उत्साह और सहभागिता देखकर यह स्पष्ट होता है कि ऐसे आयोजन उनके व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में प्रेम, सहयोग, अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग पर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। बच्चों को उनके जीवन से सीख लेकर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। शिक्षकों ने बच्चों को श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से परिचित कराते हुए सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, कर्तव्य और निस्वार्थ भाव से कार्य करने का संदेश दिया। रचनात्मक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी ने उन्हें सीखने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान किया। समारोह में बच्चों की आकर्षक वेशभूषा, कृष्ण-राधा की झांकियां, दही हांडी और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां प्रमुख आकर्षण रहीं।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जानकारी भी दी गई। पूरे आयोजन के दौरान बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया और विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। जन्माष्टमी समारोह के समापन पर विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। आयोजन ने बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों को समझने का अवसर दिया। भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर यह जन्माष्टमी समारोह विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार के लिए यादगार बन गया।

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