अंधेरे और नांव के भरोसे जिंदगी है. स्कूली बच्चियों ने जो बातें बताई, वह दिलों को झकझोरने वाली थीं. बलिया में बाढ़ के पानी से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. स्थानीय निवासियों को बिजली, पानी और आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है. लोग प्रशासन से तत्काल मदद की अपील कर रहे हैं. अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. जहरीले जीव जंतुओं को देख लोग सहम जा रहे हैं.
दूध के बिना तड़प रहे बच्चे
निहोरा नगर निवासी गुड़िया देवी ने बताया कि उन्हें सरकार से मदद की उम्मीद है, क्योंकि जिले से कोई सहायता नहीं मिली है. उन्होंने छोटे बच्चों के साथ बड़ी परेशानी का जिक्र किया. एक अन्य महिला ने बताया कि उनका छोटा बच्चा दूध के बिना तड़प रहा है और शहर से दूध लाने में दिक्कत हो रही है. सांप और बिच्छुओं के डर से आवागमन मुश्किल हो गया है. बिजली गुल है और पीने के पानी का भी संकट है. लोग चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं और पानी लगातार बढ़ रहा है. वहीं एक महिला के घर में रात में पानी घुस गया, जिसके बाद नाव की मदद से वह बाहर निकलीं. उनके झोले में एक जहरीला सांप था, लेकिन गनीमत रही कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है.
बुजुर्ग महिला प्रभावती ने बताया कि उनके घर में पानी भरा हुआ है और स्थिति काफी दयनीय होती जा रही है. पंखा गिरने से उनके हाथों में गंभीर चोट आई है, जिसके लिए उन्हें नाव से मेडिकल स्टोर से दवा लानी पड़ी. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है.
नाव के भरोसे चल रही पढ़ाई
हरीना वर्मा ने बताया कि रातें अंधेरे में कट रही हैं क्योंकि बिजली नहीं है. उन्होंने जिला प्रशासन से सहायता की मांग की और कहा कि वे हर समय डर के साए में जीने को मजबूर हैं. खाने का भी संकट पैदा हो गया है. कृष्णा कुमार गुप्ता ने बताया कि लगभग 9 कॉलोनियां जलमग्न हैं. कक्षा 6 की छात्रा इशानी ने बताया कि उनकी पढ़ाई नाव के भरोसे चल रही है और कभी-कभी उन्हें पानी में भी जाना पड़ता है, जिससे उनका पूरा स्कूली ड्रेस भीग जाता है. रात में बिजली न होने के कारण उन्हें मोमबत्ती जलाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.
कक्षा 4 की छात्रा स्नेहा सोनी ने बताया कि उन्हें बहुत ज्यादा समस्या हो रही है और रात में अंधेरा होने के कारण पढ़ाई नहीं हो पाती है. सुबह स्कूल जाना भी मुश्किल है. बच्ची ऋतु गुप्ता ने बताया कि पढ़ाई सही से नहीं हो पा रही है और कहीं आना-जाना भी मुश्किल है. उन्हें जूते खोलकर आना-जाना पड़ता है. कक्षा 6 वीं की छात्रा खुशबू ने कहा कि, स्कूल से आने-जाने में बहुत पीड़ा हो रही है. पढ़ाई करके नांव से उतरती 7 वीं की छात्रा किंजल गुप्ता ने बड़े भावनात्मक रूप से कहा कि, आने जाने में बहुत दिक्कत है, अब तो नालियां भी खुल जाएंगी जी, स्कूल भी नहीं जा पाएंगी. अब तो पढ़ाई एकदम छुटने ही वाली है.
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