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-सेवानिवृत्त संयुक्त उपनिदेशक ने कारोबारी को जेल भेजने और फर्म बर्बाद करने की दी धमकी
-55 लाख रुपये वसूल चुके थे आरोपी, सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। इंदिरापुरम थाना पुलिस और स्वाट टीम ने खुद को आईबी का सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक बताकर कारोबारी से 15 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना अनिल प्रताप सिंह समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कारोबारी से जेल भेजने और फर्म बर्बाद करने की धमकी देकर 55 लाख रुपये वसूल लिए थे। पुलिस ने इनके कब्जे से एक लाख 92 हजार रुपये, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद की है। बुधवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में डीसीपी सिटी एवं ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य की मौजूदगी में मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इंदिरापुरम निवासी उद्यमी विकास मित्तल ने एक सितंबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि कुछ लोगों ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनसे 15 करोड़ रुपये की मांग की। बाद में पांच करोड़ रुपये में मामला निपटाने की बात तय हुई और आरोपियों ने उनसे 55 लाख रुपये वसूल लिए।

पुलिस के अनुसार विकास मित्तल की दिल्ली स्थित फर्म ए-टू-जेड को एनआईए और सीबीआई से संबंधित एक नोटिस मिला था। फर्म के मैनेजर योगेश ने इस संबंध में अपने परिचित सलमान से चर्चा की। सलमान ने उच्च अधिकारियों से अपनी जान-पहचान होने का दावा करते हुए नोटिस का निपटारा कराने का भरोसा दिया। इसके बाद सलमान और सिद्धार्थ जैन के माध्यम से अनिल प्रताप सिंह ने योगेश से संपर्क किया। अनिल ने खुद को आईबी का संयुक्त निदेशक बताते हुए नोटिस खत्म कराने के नाम पर 15 करोड़ रुपये की मांग की। रकम नहीं देने पर विकास मित्तल को जेल भेजने और फर्म बर्बाद करने की धमकी दी गई। आरोपी ने योगेश के बाद सीधे फर्म मालिक विकास मित्तल से संपर्क किया और दबाव बनाकर अवैध वसूली की। पुलिस के मुताबिक बाद में पांच करोड़ रुपये में सौदा तय करने का दबाव बनाया गया और अलग-अलग माध्यमों से कारोबारी से 55 लाख रुपये वसूल लिए गए।

सीसीटीवी फुटेज से खुला गिरोह का राज
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। पुलिस टीम ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पंचशील हाईनेस सोसायटी निवासी अनिल प्रताप सिंह (64), दिल्ली के वसंतकुंज निवासी अंकित द्विवेदी और दिल्ली के जेपी ब्लॉक, पीतमपुरा निवासी सिद्धार्थ जैन को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कारोबारी से रंगदारी वसूलने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लाख 92 हजार रुपये, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद की है। डायरी में लेन-देन और संपर्कों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात कही जा रही है। पुलिस बरामद रकम के संबंध में भी जांच कर रही है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी बना रखा था अधिकारियों का रौब
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अनिल प्रताप सिंह आईबी में संयुक्त उपनिदेशक के पद से वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुआ था। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह अपने पुराने पद और विभाग का रौब दिखाकर लोगों को प्रभावित करता था। आरोपी ने आईबी में अपनी पूर्व सेवा का हवाला देकर कारोबारी को विश्वास में लिया और फिर उसे कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर रकम ऐंठी। पुलिस के अनुसार अनिल प्रताप सिंह ने रंगदारी वसूलने के लिए अपने बेटे अनिकेत उर्फ कबीर सिंह और उसके दोस्त अंकित द्विवेदी को भी कारोबारी के पास भेजा था। दोनों ने विकास मित्तल को जेल जाने और फर्म बंद होने का भय दिखाकर 55 लाख रुपये वसूले।

मुख्य आरोपी का बेटा और सलमान फरार
पुलिस के मुताबिक इस गिरोह में अनिल प्रताप सिंह, उसका बेटा अनिकेत उर्फ कबीर सिंह, सिद्धार्थ जैन, सलमान और अंकित द्विवेदी शामिल हैं। इनमें अनिल, अंकित और सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान अभी फरार हैं। पुलिस टीम दोनों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन, डायरी और बैंक खातों की जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह ने इससे पहले भी किसी अन्य कारोबारी या फर्म को इसी तरह धमकाकर वसूली तो नहीं की। डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस रंगदारी की पूरी रकम की बरामदगी और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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