जनक दीदी ने इस परंपरा की शुरुआत की कहानी साझा करते हुए बताया, “रक्षाबंधन पर पौधे रोपने का यह सिलसिला वर्ष 1986 में शुरू हुआ था। उस समय मेरी मुलाकात ट्रेन में राजेंद्र ओचानी जी से हुई थी। इसके बाद, जब मैं आदिवासी लड़कियों के प्रशिक्षण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही थी, तब वे अपनी पत्नी ज्योति के साथ हर रविवार को अपनी सेवाएँ देने लगे। पहली बार जब भैया ने मुझसे राखी बंधवाने के बारे में पूछा, तो मैंने सहज ही ‘हाँ’ कह दिया। इसके बाद ज्योति भाभी ने धीरे से मुझसे पूछा कि मुझे साड़ी पसंद है या सलवार-सूट? तब मैंने उनसे कहा, ‘मुझे सबसे ज़्यादा पौधा पसंद है।’ बस, तभी से हमारा रक्षाबंधन इसी अनोखे अंदाज़ में मनाया जा रहा है।”
कार्यक्रम का शुभारंभ विख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत के शंखनाद से हुआ। इसके पश्चात जनक दीदी, डॉ. प्रकाश कौशल, डॉ. प्रिया शर्मा और बच्चों ने मिलकर बहाई प्रार्थनाएँ कीं। डॉ. भरत रावत और प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा पौराणिक ने पौधारोपण कर ‘पर्यावरण बचाओ’ गीत के माध्यम से सभी का आह्वान किया। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर जनक दीदी के इस 41वें रक्षाबंधन के अवसर पर 50 पौधे रोपे।
इस आयोजन में लखनऊ, दिल्ली, ग्वालियर, इंदौर, सनावदिया और आसपास के गाँवों से आए कई भाई-बहन शामिल हुए। मुख्य अतिथियों और प्रतिभागियों में फाउंडेशन की ट्रस्टी अनुराधा दुबे, प्रो. आशीष दुबे, गाँव के उप-सरपंच प्रकाश रावलिया, चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री लक्ष्मण खंडेलवाल, समाजसेवी श्रीमती विद्यावती रावत, एक्रोपोलिस के डायरेक्टर डॉ. अनुराग तिवारी (उनकी बहन अंजु, सत्येंद्र और बेटा अद्वै), सोलर इंजीनियर सुसुमिता भट्टाचार्य, आर्किटेक्ट अंगद कसलीवाल, प्रणीत, सृष्टि, इंद्र भंडारी एवं उनका परिवार, भारत भंडारी, महेंद्र धाकड़, रवि गुप्ता, हेमंत, केशव, मनोज नागर एवं उनके बच्चे, सस्टेनेबल फार्मर भारत सिंह, शैलेंद्र और उनके मित्र प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
पौधारोपण का यह कार्य और पौधों की आगे की देखभाल का ज़िम्मा वन विभाग इंदौर और जैविक सेतु के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में जनक दीदी ने सभी उपस्थित जनों का हृदय से हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया।
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