- Hindi News
- Career
- Nepal Tibet Flood Tragedy | School Bridge Collapses Rescue Operation
- कॉपी लिंक
नेपाल-तिब्ब्त में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें सिर्फ नेपाल में 903 मौते हुई हैं और 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं।
जहां एक ओर अब तक मौत का आंकड़ा 900 के पार हो गया है, वहीं नेपाल में एक प्रिंसिपल ने अपनी सूझबूझ से करीब 1600 स्कूली बच्चों की जान बचाई।
त्रिशूली घाटी के हायर सेकेंडरी की घटना
उत्तरी-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में बने त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में 1600 बच्चे पढ़ते हैं।
26 अगस्त को जब बाढ़ आई तब ये स्कूल खुला हुआ था। 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे और सब कुछ सामान्य था।
तभी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को उनके एक दोस्त ने बताया कि बाढ़ आ गई है और पानी ने ऊपर की तरफ बसे गांवों को भी अपनी चपेट में ले चुका है।
राजेंद्र ने तुरंत फैसला लिया, स्कूल की घंटी बजाई
प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी खबर मिलते ही तुरंत हरकत में आए और उन्होंने तुरंत पता किया कि अभी कितनी स्कूल बसें स्कूल आ चुकी हैं और कितनी आनी बाकी हैं।
थोड़ी देर में ही उनके पास लिस्ट आई कि अभी 700 बच्चे या तो पैदल या फिर स्कूल बस से स्कूल की तरफ आना बाकी हैं। तभी तुरंत राजेंद्र ने सभी स्कूल ड्राइवर को फोन किया और बसों को स्कूल न लाने का आदेश दिया।
हालांकि ये स्कूल नदी से 200 की फीट की ऊंचाई पर बना था लेकिन राजेंद्र ने फिर भी कोई देरी नहीं की।
आंखों के सामने स्कूल का पुल ढहा
इसी बीच कुछ पेरेंट्स ने भी प्रिंसिपल को फोन किया कि बाढ़ का पानी स्कूल की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रिंसिपल राजेंद्र ने स्कूल की तरफ आती बस को तुरंत वापस भेज दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, बस ने मुड़ते ही स्कूल के सामने के पुल को जैसे ही पार किया, पुल बह गया। तब तक स्कूल में चीख-पुकार मच गई और बच्चे-टीचर सब डरे हुए थे।
प्रिंसिपल ने सूझबूझ से 1600 से ज्यादा बच्चों को बचाया
प्रिंसिपल ने पल के बहते ही सभी टीचर्स को बच्चों को लेकर पहाड़ी की ऊंचाई पर जाने को कहा। सभी बच्चों को पैदल पहाड़ी के ऊपर पहुंचाया गया। सारे बच्चों को भेजने और स्कूल को दोबारा चेक करने के बाद वो भी पहाड़ी की तरफ चढ़े।
इस तरह प्रिंसिपल ने सभी बच्चों, टीचर्स और कर्मचारियों की जान बचा ली। स्कूल में कुल उस समय कुल 1644 लोग थे, जिनमें से 1643 लोग बचा लिए गए।
सिर्फ एक सोशल हिस्ट्री के टीचर सैंटोस परियार की मौत हो गई। वो बाढ़ में बह गए।
भारत से मदद की उम्मीद
राजेंद्र ने बताया कि हमारे ऊपर पहुंचते ही 30 सेकेंड में स्कूल ढह गया था। हमने सभी बच्चों को उनके पेरेंट्स तक पहुंचाया। साथ ही उन्होंने बताया कि अभी जब तक उन्हें कोई मदद नहीं मिलती वे बच्चों को नहीं पढ़ा सकेंगे। क्योंकि स्कूल पूरी तरह खत्म हो गया है और कनेक्टिविटी ब्रिज भी टूट चुका है।
राजेंद्र खुद भी इसी स्कूल से पढ़ें हैं और उन्होंने भारत से मदद की अपील की है। उन्होंने बताया कि जब नेपाल में भूकंप आया था, तब भारत ने इस स्कूल को दोबारा बनाने में मदद की थी और एक बस भी डोनेट की थी।
———————-
ये खबर भी पढ़ें..
31 अगस्त के करेंट अफेयर्स:कैदियों को जेल के बाहर जाकर काम करने की छूट मिलेगी, शशिधर जगदीशन HDFC बैंक के CEO का पद छोड़ेंगे
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- पूरी खबर पढ़ें..
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||


