गांवों में खेतों की मेड़, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर एक छोटा हरा पौधा अक्सर दिखाई देता है. ज्यादातर लोग इसे साधारण खरपतवार समझकर उखाड़ देते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे सिडा एक्यूटा (Sida acuta) के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण इलाकों में इसे कई जगह बला या जंगली बला भी कहा जाता है. यह पौधा लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होता आ रहा है और इसकी पत्तियां, जड़ व तना औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं. सिडा एक्यूटा, जिसे बला या जंगली बला भी कहते हैं, एक औषधीय पौधा है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, यह सूजन कम करने, घाव भरने और त्वचा समस्याओं में उपयोगी है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि सिडा एक्यूटा एक झाड़ीदार पौधा है जो लगभग 1 मीटर तक ऊंचा हो सकता है. इसकी पत्तियां लंबी, नुकीली और किनारों पर हल्की दांतेदार होती हैं. बरसात के मौसम में यह तेजी से बढ़ता है और खेतों के आसपास आसानी से मिल जाता है. इसके छोटे पीले रंग के फूल इसकी पहचान को और आसान बनाते हैं.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार सिडा एक्यूटा में सूजन कम करने, शरीर को ताकत देने और घाव भरने जैसे गुण बताए गए हैं. यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका उपयोग कई घरेलू नुस्खों में करते हैं. हालांकि किसी भी बीमारी में इसका सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए.
Add News18 as
Preferred Source on Google
जमुना प्रसाद यादव घाव भरने में भी होता है प्रयोग: साफ पत्तियों का लेप छोटे-मोटे घावों पर लगाया जाता रहा है. गांवों में यह घरेलू उपचार के रूप में प्रसिद्ध है. किसी गहरे या संक्रमित घाव में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
घाव भरने में भी होता है प्रयोग: साफ पत्तियों का लेप छोटे-मोटे घावों पर लगाया जाता रहा है. गांवों में यह घरेलू उपचार के रूप में प्रसिद्ध है. किसी गहरे या संक्रमित घाव में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
त्वचा की समस्याओं में भी फायदेमंद: सिडा एक्यूटा का उपयोग गांवों में खुजली, फोड़े-फुंसी और हल्की त्वचा की जलन जैसी समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता है. इसकी ताजी पत्तियों का लेप बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है, जिससे आराम मिलने की मान्यता है. हालांकि किसी भी गंभीर त्वचा रोग में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
लोक चिकित्सा और आयुर्वेद में सिडा एक्यूटा को बलवर्धक गुणों वाला पौधा माना जाता है. इसकी जड़ का उपयोग कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक तैयारियों में किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि इसका सेवन शरीर की कमजोरी कम करने, ताकत बढ़ाने और ऊर्जा बनाए रखने में सहायक हो सकता है. हालांकि इन दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इसका उपयोग हमेशा आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
उपयोग करते समय रखें ये सावधानियां: जमुना प्रसाद यादव बताते हैं गर्भवती महिलाएं बिना सलाह सेवन न करें, छोटे बच्चों को स्वयं न दें, गंभीर बीमारी में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, एलर्जी या परेशानी होने पर तुरंत उपयोग बंद करें, हमेशा आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लें. पौधे के कौन-कौन से भाग काम आते हैं पत्तियां लेप बनाने में जड़ काढ़ा व आयुर्वेदिक प्रयोग तना कुछ पारंपरिक औषधियों में बीज सीमित घरेलू उपयोग.
जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि सिडा एक्यूटा गांवों में आसानी से मिलने वाला एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. पारंपरिक रूप से इसका उपयोग जोड़ों के दर्द, सूजन, घाव, त्वचा संबंधी समस्याओं और कमजोरी जैसी स्थितियों में किया जाता रहा है. लेकिन सुरक्षित उपयोग के लिए सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह सबसे जरूरी है.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



