राजधानी के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही सुगम बनाने के लिए नजफगढ़ ड्रेन के दोनों किनारों पर 61 किलोमीटर लंबे सड़क कॉरिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। ढांसा बॉर्डर से वजीराबाद तक प्रस्तावित इस कॉरिडोर में जगह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कहीं एलिवेटेड तो कहीं एट-ग्रेड (सतह पर) सड़क विकसित करने के विकल्पों का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव घटाने के साथ विभिन्न इलाकों के बीच सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसके लिए एक्सपर्ट कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 19.62 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली कंसल्टेंसी के तहत 61 किलोमीटर क्षेत्र का ट्रैफिक और तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा। यह काम 120 दिन में पूरा किया जाना है। अध्ययन के आधार पर सड़क के स्वरूप, लेन की संख्या, जंक्शन और सर्विस रोड की जरूरत समेत निर्माण से जुड़े प्रमुख पहलुओं पर फैसला होगा।
माइक्रो-सिमुलेशन भी कराया जा सकता है
परियोजना में प्रमुख इंटरसेक्शन और मिड-सेक्शन का विस्तृत डिजाइन भी तैयार होगा। जरूरत पड़ने पर यातायात की वास्तविक स्थिति और संभावित सुधारों को समझने के लिए माइक्रो-सिमुलेशन कराया जा सकता है। धीमी गति वाले वाहनों और अलग-अलग दिशाओं से होने वाले क्रॉस मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए जंक्शन पर यातायात प्रबंधन के समाधान सुझाए जाएंगे।
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