Last Updated:
CJI सूर्यकांत ने लंदन में कॉमनवेल्थ सचिवालय में कहा कि विकासशील देशों पर कुछ दशकों में तेजी से क्लीन एनर्जी अपनाने का दबाव डालना अनुचित है. उन्होंने कहा कि औद्योगिक देशों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में करीब दो सदियां लगीं, जबकि अब औद्योगिकीकरण कर रहे देशों से तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की उम्मीद की जा रही है. उन्होंने क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में तत्काल जरूरत के साथ निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी का संतुलन बनाने पर जोर दिया.
CJI सूर्यकांत ने कहा: विकासशील देशों के लिए क्लीन एनर्जी पर ज़ोर देना गलत है (फाइल फोटो)
CJI Suryakant: क्लीन एनर्जी पर सीजेआई सूर्यकांत ने विकसित देशों को खूब सुनाया है. अंग्रेजों के घर में ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विकासशील देशों के लिए क्लीन एनर्जी पर जोर देना एकदम गलत है. लंदन में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जलवायु परिवर्तन और क्लीन एनर्जी को लेकर विकसित देशों को आईना दिखाया है. उन्होंने कहा कि जो देश आज विकासशील और औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, उन पर कुछ ही दशकों में कोयला और तेल छोड़कर तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है. इतना ही नहीं, अगर ये देश इस बदलाव को उतनी तेजी से नहीं कर पाते तो उनकी आलोचना भी की जाती है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि जिन देशों ने अपनी आर्थिक ताकत बनाने में करीब दो सदियां कोयले और तेल का इस्तेमाल किया, वे अब औद्योगिकीकरण कर रहे देशों से तुरंत स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं. सीजेआई सूर्यकांत ने कॉमनवेल्थ देशों से कहा कि यह गलत है कि जिन औद्योगिक देशों ने क्लीन एनर्जी अपनाने में दो सदियां लगाईं, वे अब औद्योगीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे देशों से कुछ ही दशकों में रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ने के लिए कह रहे हैं. जो लोग 200 साल लगा दिए, उन्हें अब विकासशील देशों से तुरंत रिजल्ट चाहिए. ऐसा नहीं करने पर उनकी आलचोना भी की जाती है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया के सामने जलवायु संकट एक बड़ी चुनौती है. इससे निपटने के लिए क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ना जरूरी है. मगर इस बदलाव का बोझ सभी देशों पर एक जैसा नहीं डाला जा सकता. उन्होंने यह बात शुक्रवार को लंदन के मार्लबोरो हाउस में आयोजित हाई-लेवल कॉमनवेल्थ पॉलिसी डायलॉग ऑन क्लाइमेट जस्टिस में कही. यह कार्यक्रम जलवायु न्याय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था.
सीजेआई ने कैसे आइना दिखाया
उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की परिस्थितियां अलग हैं. कुछ देश पहले ही औद्योगिक विकास के उस स्तर तक पहुंच चुके हैं जहां वे तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर जा सकते हैं. दूसरी ओर, कई देश अभी अपने उद्योग, बिजली व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जलवायु संकट में एक ही तरह का नहीं, बल्कि दोहरा अन्याय दिखाई देता है. पहला यह कि जलवायु परिवर्तन का असर सभी देशों और समुदायों पर बराबर नहीं पड़ता. दूसरा यह कि कोयला, तेल और गैस से स्वच्छ ऊर्जा की ओर जाने की कीमत भी सभी को बराबर नहीं चुकानी पड़ रही है.
सीजेआई ने और क्या मुद्दा उठाया
उन्होंने कहा, ‘जो देश अब औद्योगिकीकरण कर रहे हैं, उनसे तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने को कहा जा रहा है और जब वे पर्याप्त तेजी से आगे नहीं बढ़ पाते तो अक्सर आलोचना का सामना भी उन्हें करना पड़ता है. जबकि आज इस बदलाव की वकालत करने वाले देशों ने दो सदियों तक कोयले और तेल के इस्तेमाल से अपनी आर्थिक ताकत बनाई.’ सीजेआई सूर्यकांत ने सिर्फ कोयले और तेल के इस्तेमाल का मुद्दा ही नहीं उठाया. उन्होंने क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी खनिजों से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान पर भी चिंता जताई.
About the Author
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…
और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



