रक्षाबंधन से पहले दिल्ली में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 131 किलोग्राम खराब खोया, बेसन और आटा मौके पर ही नष्ट किया। संदिग्ध पनीर, खोया, घी, मिठाइयों और अन्य खाद्य वस्तुओं के 37 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। त्योहारों पर मिठाई और दूध उत्पादों की मांग बढ़ती है। दिल्ली सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग को जांच और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग की टीमें मिठाई बनाने वाली जगहों, मंडियों और बाजारों में छापे मार रही हैं। खाने-पीने की दुकानों और संवेदनशील जगहों पर भी जांच जारी है। खास तौर पर पनीर, खोया, घी और मिठाइयों जैसी अधिक मांग वाली सामग्री जांची जा रही है। अभियान का उद्देश्य मिलावटी सामग्री को बाजार तक पहुंचने से रोकना है। विभाग ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। संदिग्ध उत्पादों के 37 नमूने निर्धारित प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि नमूने मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभियान और निरीक्षण
खाद्य सुरक्षा विभाग के उड़नदस्ते ने ओखला, बादली, निहाल विहार और नरेला में मिठाई बनाने वाली जगहों का निरीक्षण किया। ओखला और घंटाघर सब्जी मंडी समेत कई स्थानों पर भी अभियान चला। विभाग उन जगहों पर ध्यान दे रहा है जहां त्योहारों में खाद्य सामग्री की बिक्री बढ़ती है। खाद्य सुरक्षा विभाग मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा, खाद्य सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ बनाने, रखने, बांटने या बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगातार निरीक्षण और नमूना लेना जारी रहेगा।
उपभोक्ताओं के लिए सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्लीवासियों को मिठाई खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ज्यादा रंग वाली, बदबूदार या असामान्य स्वाद वाली मिठाई लेने से बचें। पैक मिठाई की समाप्ति की तारीख अवश्य देखें। भरोसेमंद दुकान से ही मिठाई खरीदें, सस्ते के लालच में गुणवत्ता से समझौता न करें।
गाजियाबाद में खाद्य विभाग का छापा
मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबारी खाद्य पदार्थों में ऐसे केमिकल तक इस्तेमाल करने से नहीं हिचक रहे हैं, जिनका उपयोग खाने के लिए होता ही नहीं। सुदामापुरी में कपड़े रंगने में इस्तेमाल होने वाले सेफोलाइट केमिकल से रसगुल्ले सफेद करने वाली बिना लाइसेंस की फैक्टरी पकड़ी गई है।
यहां गंदगी के बीच तैयार हो रहे करीब 250 किलो रसगुल्लों को नष्ट कराया गया और फैक्टरी बंद करा दी गई। रसगुल्लों में कीड़े भी मिले। सेफोलाइट का प्रमुख उपयोग ब्लीचिंग एजेंट के रूप में कपड़ों की रंगाई में किया जाता है। आरोप है कि रसगुल्लों को ज्यादा सफेद और आकर्षक दिखाने के लिए यह केमिकल मिलाया जा रहा था। पहले भी सुदामापुरी में ऐसी फैक्टरी पकड़ी जा चुकी है।
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