साल 1968 में वहीदा रहमान और राजकुमार की फिल्म ‘नील कमल’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म की पुनर्जन्म की कहानी को लोगों ने काफी पसंद किया था. फिल्म के गाने भी काफी हिट हुए थे. खासतौर पर एक गाना,’आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’ आज भी पुराने हिंदी फिल्म संगीत के सबसे यादगार गानों में गिना जाता है. मोहम्मद रफी की दर्दभरी आवाज, साहिर लुधियानवी के भावुक बोल और संगीतकार रवि की खूबसूरत धुन ने इस गाने को ऐसा बना दिया कि कई दशकों तक लोग इसे भूल नहीं पाए हैं.
राजकुमार ने रचा इतिहास
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार राजकुमार का अपना एक अलग ही अंदाज था. उनकी फिल्में, उनके डायलॉग और उनके एक्टिंग स्टाइल को लेकर चाहकर भी भुला नहीं पाते. उनके कई गाने तो अमर ही हो गए. उन्हीं में से एक है. साल 1968 में आई फिल्म ‘नील कमल’ का गाना’आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’. इस फिल्म में उन्होंने चित्रसेन का किरदार निभाया था.
सालो बाद आज भी राजकुमार और वहीदा रहमान के इस गाने की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. साल 1968 में डायरेक्टर राम माहेश्वरी की फिल्म के इस गाने में राज कुमार, अपनी प्रियतमा नील कमल यानी वहीदा रहमान को पुकारते हैं. गाने के बोल ऐसे हैं कि लोग आज भी इस गाने को गुनगुनाते हैं. फिल्म की कहानी पुनर्जन्म और अधूरे प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है.फिल्म में वहीदा रहमान ने सीता नाम की लड़कीट का किरदार निभाया था.
मोहम्मद रफी ने बनाया अमर
‘नील कमल’ के गाने ‘आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’ गाने में चित्रसेन अपनी प्रिय नील कमल को पुकारते हैं और वहीदा रहमान अपने पिछले जन्म को याद कर मोहित होकर नींद में चलने लगती है. गाने का संगीत भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत था.इस गाने को आवाज मोहम्मद रफी ने दी है. गाने के बोल ऐसे हैं कि आज भी प्यार में डूब आशिक इस गाने के दीवाने हो जाते हैं. गाने में वहीदा रहमान दुल्हन बनी चित्रसेन की एक पुकार पर घर छोड़कर निकल पड़ती है. आज भी लोग इस गाने को भूल नहीं हैं.
फिल्म के बाकी गाने भी हिट
इस फिल्म की सबसे खास बात इसकी कहानी ही नहीं, इसका संगीत भी रहा. रवि के संगीत और साहिर लुधियानवी के बोलों से सजे इस एल्बम में ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’, ‘रोम रोम में बसने वाले राम’, ‘शर्मा के यूं न देख’ और ‘आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’ जैसे गानों ने फिल्म को हिट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इनमें ‘आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’ मोहम्मद रफी की आवाज में प्रेम और विरह का ऐसा गीत बना, जिसे आज भी सुनने पर 1968 के उस दौर की याद ताजा हो जाती है.
बता दें कि इस फिल्म में मनोज कुमार ने राम की भूमिका निभाई थी. फिल्म का निर्देशन राम माहेश्वरी ने किया था और कहानी गुलशन नंदा के उपन्यास पर आधारित थी.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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