अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का खुलासा करने वाले स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस की ओर से उनके खिलाफ दर्ज रोड रेज के एक मामले की एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में अभिषेक ने आरोप लगाया है कि यह एफआईआर पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी है, जिसे उनके स्वतंत्र पत्रकारिता कार्यों और चढ़ावा चोरी के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने के कारण उन्हें परेशान करने के दुर्भावना से दर्ज किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें अब तक एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई है। पुलिस आसपास के दुकानदारों पर घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का दबाव बना रही है।
यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि या तो इस एफआईआर को रद्द किया जाए या इस मामले की जांच सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी या दिल्ली पुलिस से कराई जाए। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने या सुरक्षित रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने में कठिनाई हो सकती है, इसलिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
अभिषेक ने कहा, उनके खिलाफ 18 अगस्त को गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस 20 अगस्त की देर रात उनके आवास पर भी पहुंची थी। एक बाइक के उनकी कार से छू जाने के बाद यह घटना हुई थी। एफआईआर में आरोप है कि अभिषेक ने बाइक सवार के साथ बदसलूकी की।
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