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Sachin Tendulkar vs Virat Kohli: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डीविलियर्स का मानना है कि सचिन तेंदुलकर ने उपमहाद्वीप के बल्लेबाजों को उछाल भरी और तेज पिचों पर सफल होने का रास्ता दिखाया था, लेकिन विराट कोहली ने उस प्रभाव को नए स्तर पर पहुंचाया. डीविलियर्स के अनुसार, सीमिंग और बाउंसी हालातों में कोहली का दबदबा सचिन से भी अधिक मजबूत रहा. साथ ही उन्होंने युवा बल्लेबाजों, खासकर केएल राहुल को विदेशी दौरों पर शतकों को 180 या उससे बड़े स्कोर में बदलने की अहम सलाह दी.
एबी डीविलियर्स ने बताया विराट या सचिन में कौन है महान.
जब सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के बाद भारतीय बल्लेबाजी की कमान विराट कोहली (Virat Kohli) के हाथों में आई, तो एक समय ऐसा लगा कि वह क्रिकेट के हर रिकॉर्ड को फिर से लिखने जा रहे हैं. टेस्ट क्रिकेट में कोहली का सफर 123 मुकाबलों में 9,230 रनों के साथ 30 शतकों और 31 अर्धशतकों पर सिमटा. हालांकि करियर के अंतिम पड़ाव में आई फॉर्म की गिरावट ने उनके कुछ बड़े रिकॉर्ड्स की गति रोक दी और उनके कुल रनों का 51.72 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सरजमीं पर दर्ज हुआ. लेकिन खेल केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होता; उसका असली पैमाना परिस्थितियों पर छोड़ी गई छाप होती है.
एबी डीविलियर्स ने बताया विराट या सचिन में कौन है महान.
डीविलियर्स की नजर में विराट का दबदबा
इसी पहलू पर बात करते हुए एबी डीविलियर्स (AB De Villiers) ने अपने यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर एक बेहद दिलचस्प और ईमानदार विश्लेषण पेश किया. डीविलियर्स का मानना है कि सचिन ने जहां भारतीय बल्लेबाजों को विदेशी पिचों पर जीवित रहने और मुकाबला करने का रास्ता दिखाया, वहीं कोहली ने उस रास्ते पर पूरी आक्रामकता के साथ राज किया. डीविलियर्स के मुताबिक, तेज उछाल और सीम होती गेंदों के सामने विराट का प्रभाव सचिन से भी ज्यादा घातक और बेखौफ नजर आया. विराट ने रक्षात्मक होने के बजाय विरोधी गेंदबाजों पर पलटवार करने की जो शैली अपनाई, उसने वैश्विक स्तर पर भारतीय बल्लेबाजी का कद और ऊंचा कर दिया.
युवा पीढ़ी के लिए तैयार हुआ ब्लूप्रिंट
डीविलियर्स आगे बताते हैं कि सचिन और विराट द्वारा तैयार किए गए इसी मजबूत आधार का असर आज की पीढ़ी पर साफ दिखाई दे रहा है. केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे आधुनिक बल्लेबाज अब विदेशी तेज पिचों पर घबराने के बजाय अपनी तकनीक पर भरोसा जताते हैं. वे उसी ब्लूप्रिंट पर आगे बढ़ रहे हैं, जिसे इन दोनों दिग्गजों ने अपने खून-पसीने से तैयार किया था.
केएल राहुल को बड़ी पारी खेलने की नसीहत
हालांकि, इसके साथ ही डीविलियर्स ने वर्तमान पीढ़ी के सामने एक अहम चुनौती भी रखी. उन्होंने खासतौर पर केएल राहुल का उदाहरण देते हुए कहा कि राहुल के पास गजब की तकनीक और क्षमता है, जिससे वह भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मजबूत कड़ी बनते हैं. लेकिन घर से दूर विदेशी दौरों पर उनका 34 का साधारण औसत उनकी असली प्रतिभा के साथ न्याय नहीं करता. डीविलियर्स ने नसीहत देते हुए कहा कि विदेशी परिस्थितियों में नई गेंद और शून्य पर आउट होने का खतरा हमेशा बना रहता है. इसलिए जब भी कोई बल्लेबाज मुश्किल हालात में क्रीज पर टिक जाए और शतक के करीब पहुंचे, तो उसे अपनी पारी को 100 तक सीमित रखने के बजाय 180 या 200 जैसे विशाल स्कोर में बदलना चाहिए.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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