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Mayawati First CM Story: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. वह चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. लेकिन उनके राजनीतिक सफर का सबसे अहम पड़ाव साल 1995 रहा. इसी साल वह पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं. उस समय उनकी उम्र करीब 39 साल थी. खास बात यह थी कि मायावती की सरकार बीजेपी के समर्थन से बनी थी. 3 जून 1995 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके साथ ही वह यूपी की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं. इसके सपा और बसपा का गठबंधन टूट चुका था. इसके बाद बीजेपी के समर्थन से मायावती के लिए सत्ता का रास्ता खुला. ‘UP CM के गजब किस्से’ के इस भाग में सिलसिलेवार पढ़िए वह पूरा किस्सा, जब बीजेपी के समर्थन से एक दलित महिला यूपी की मुख्यमंत्री बनी और प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया.

कांशीराम के साथ राजनीति में आईं मायावती

मायावती का राजनीतिक सफर आसान नहीं था. दिल्ली में पढ़ाई और नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात कांशीराम से हुई. कांशीराम ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद मायावती बहुजन समाज पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में उतर गईं. 1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की. मायावती धीरे-धीरे पार्टी का बड़ा चेहरा बनती गईं. उनकी पहचान खास तौर पर दलित समाज की मुखर नेता के तौर पर बनने लगी. 1989 के लोकसभा चुनाव में मायावती ने बिजनौर सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका नाम तेजी से उभरने लगा.

1993 में बदली यूपी की राजनीति

अब कहानी पहुंचती है 1993 के विधानसभा चुनाव पर. उस समय यूपी में बीजेपी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी. लेकिन मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने चुनाव के बाद हाथ मिला लिया. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर सरकार बनाई. मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने और मायावती की पार्टी सरकार में साझेदार बनी. लेकिन दोनों दलों का यह साथ ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला. दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ता गया और आखिरकार गठबंधन टूट गया.

2 जून 1995 को हुआ बड़ा राजनीतिक मोड़

1995 में यूपी की राजनीति में ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने देशभर का ध्यान खींच लिया. मायावती ने मुलायम सिंह यादव की सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया. इसके बाद राज्य में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया. मायावती ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. लेकिन उनके पास अकेले बहुमत नहीं था. यहीं से बीजेपी की भूमिका शुरू हुई.

बीजेपी ने दिया मायावती को समर्थन

उस समय भारतीय जनता पार्टी ने मायावती को समर्थन देने का फैसला किया. बीजेपी के समर्थन के बाद मायावती के लिए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. 3 जून 1995 को मायावती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वह यूपी की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं. यह भारतीय राजनीति में भी ऐतिहासिक पल था. एक दलित महिला का देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता के शीर्ष पद तक पहुंचना अपने आप में बड़ी राजनीतिक घटना थी.

मायावती का पहला कार्यकाल छोटा रहा

मायावती पहली बार लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रह सकीं. बीजेपी के समर्थन से बनी उनकी सरकार करीब चार महीने ही चली. अक्टूबर 1995 में उनकी सरकार गिर गई. इसके बाद यूपी में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. लेकिन इन कुछ महीनों में मायावती ने अपनी राजनीतिक ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया कि आगे चलकर वह यूपी की राजनीति की सबसे बड़ी नेताओं में शामिल हो गईं.

बीजेपी और BSP की राजनीति यहीं से बदली

1995 का यह प्रयोग सिर्फ मायावती के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं था. इसने बीजेपी और बहुजन समाज पार्टी के बीच राजनीतिक रिश्ते की शुरुआत भी की. आने वाले वर्षों में दोनों दलों के बीच कई बार गठबंधन हुआ. कभी मायावती बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बनीं तो कभी बीजेपी ने उनकी सरकार को समर्थन दिया. यूपी की राजनीति में यह गठजोड़ उस दौर की सबसे दिलचस्प राजनीतिक घटनाओं में गिना जाता है.

फिर चार बार CM बनीं मायावती

1995 के बाद मायावती तीन और बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. वह 1997 में भी मुख्यमंत्री बनीं. इसके बाद 2002 में बीजेपी के समर्थन से उनकी सरकार बनी. हालांकि 2003 में बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया और उनकी सरकार चली गई. इसके बाद 2007 में मायावती ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया. यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे मजबूत दौर था. उन्होंने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और पांच साल का कार्यकाल पूरा किया.

एक गठबंधन ने बदल दिया पूरा राजनीतिक सफर

मायावती की पहली मुख्यमंत्री वाली कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह उस समय सत्ता में पहुंचीं, जब यूपी की राजनीति में किसी एक दल के लिए सरकार बनाना आसान नहीं था. एक तरफ समाजवादी पार्टी और बीएसपी का गठबंधन टूट चुका था. दूसरी तरफ बीजेपी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर सामने थी. इसी बीच बीजेपी के समर्थन ने मायावती को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया. 1995 में मुख्यमंत्री बनने वाली वही मायावती आगे चलकर ऐसी नेता बनीं, जिन्होंने 2007 में यूपी में बहुमत की सरकार बनाकर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया. यानी जिस महिला ने पहली बार बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री पद संभाला था, कुछ साल बाद वही अपने दम पर यूपी की सत्ता पर काबिज हुईं. यही मायावती के राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा और दिलचस्प मोड़ है.

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