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पीएम केयर्स फंड को 2020 में बनाया गया था।
पीएम केयर्स फंड में घरेलू दान 2024-25 में 30फीसदी घटकर करीब 479 करोड़ रुपए रह गया। विदेशी दान भी 18 फीसदी घटकर 92.8 लाख रुपए रह गया है।
फंड की ताजा ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में कुल 8,452 करोड़ रुपए जमा थे। एक साल पहले 31 मार्च 2024 को यह रकम 7,173 करोड़ रुपए थी।
इस रकम में 7,846 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और 605 करोड़ रुपए सेविंग्स बैंक अकाउंट में रखे गए थे।
पिछले साल 681.8 करोड़ घरेलू दान मिला
साल 2023-24 में पीएम केयर्स फंड में को घरेलू दान के तौर पर 681.8 करोड़ रुपए मिले थे। इसी साल विदेशी दान से 1.13 करोड़ रुपए मिले थे।
साल 2024-25 में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम पर 87.8 लाख रुपए खर्च किए गए। पिछले साल इस स्कीम पर 15.37 करोड़ रुपए खर्च हुए।
साल 2024-25 में फंड से कुल 87.85 लाख रुपए का भुगतान किया गया। पिछले साल यह रकम 15.6 करोड़ रुपए थी।
2020-21 में घरेलू दान 7,184 करोड़ रुपए पर पहुंचा था
PM CARES की वेबसाइट पर मौजूद ऑडिटेड स्टेटमेंट के अध्ययन के मुताबिक, घरेलू स्वैच्छिक योगदान 2020-21 में सबसे ज्यादा 7,184 करोड़ रुपए था।
इसके बाद यह रकम 2021-22 में घटकर 1,896 करोड़ रुपए और 2022-23 में 909 करोड़ रुपए रह गई। 2024-25 में घरेलू दान घटकर करीब 479 करोड़ रुपए हो गया।
विदेशी योगदान में इससे भी ज्यादा गिरावट आई। यह 2020-21 में 495 करोड़ रुपए था, जो अगले दो वित्त वर्षों में घटकर क्रमश: 40 करोड़ रुपए और 2.57 करोड़ रुपए रह गया।
अब विदेशी योगदान 92.8 लाख रुपए है। यह 2019-20 में मिले 39.7 लाख रुपए के बाद सबसे कम रकम है।
कोविड जैसी आपात स्थिति में राहत देने के लिए बनाया गया था फंड
नरेंद्र मोदी सरकार ने PM CARES फंड को किसी भी तरह की आपात स्थिति या संकट से निपटने के लिए बनाया था। इसका मकसद कोविड महामारी जैसी स्थिति में प्रभावित लोगों को राहत देना था।
इस फंड को पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड किया गया है। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं।
फंड में पूरी रकम स्वैच्छिक योगदान से आती है। इसे सरकार से बजट के तौर पर कोई पैसा नहीं मिलता।
ऑक्सीजन प्लांट और वेंटिलेटर खरीदने पर भी खर्च हुआ
PM CARES का इस्तेमाल समय-समय पर इमरजेंसी केयर बढ़ाने के लिए किया गया। इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने और वेंटिलेटर खरीदने पर पैसा खर्च किया गया।
यह खर्च कोविड महामारी से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने की व्यापक कोशिश का हिस्सा था। वित्त वर्ष 2021-22 में प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन ऑक्सीजन प्लांट पर 1,703 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
इसी साल वेंटिलेटर पर 835 करोड़ रुपए खर्च हुए। वित्त वर्ष 2021-22 में फंड का कुल खर्च करीब 1,938 करोड़ रुपए था।
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