रेल सुधार समिति के अध्यक्ष रवि सोनी बताते हैं कि कोरोना काल के समय बुंदेलखंड बीना रेलवे जंक्शन से लेकर कटनी रेल खंड यानी की बीना-सागर-दमोह-कटनी ट्रैक की 9 ट्रेनें जब से बंद हुई है उसके बाद आज दिनांक तक वह वापस पटरी पर नहीं लौट सकी हैं. ट्रेनें बंद होने की वजह से पहले ही बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है. अब त्योहार के समय में मुसीबत आर्थिक रूप से भी बढ़ गई है.
ऐसे में ट्रेन से यात्रा करने वाले मुसाफिरों को खासी मुसीबत झेलनी पड़ती है. खचाखच ट्रेन के डिब्बे भारी होती है कई बार यात्री बोगी के गेट पर लटके हुए भी दिखाई देते हैं. इस मुसीबत से बचाने का रेलवे के पास ही अच्छा खासा विकल्प है लेकिन फिर भी वह यात्रियों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रही है, बंद पड़ी ट्रेनों को अगर त्यौहार के समय शुरू कर दिया जाए तो हजारों रेल यात्रियों को यह किसी तोहफा से काम नहीं होगा.
6साल बाद भी पटरी पर नहीं लौटी 9 ट्रेनें
रेल सुधार समिति के अध्यक्ष रवि सोनी बताते हैं कि कोरोना काल के समय बुंदेलखंड बीना रेलवे जंक्शन से लेकर कटनी रेल खंड यानी की बीना-सागर-दमोह-कटनी ट्रैक की 9 ट्रेनें जब से बंद हुई है उसके बाद आज दिनांक तक वह वापस पटरी पर नहीं लौट सकी हैं. ट्रेनें बंद होने की वजह से पहले ही बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है. अब त्योहार के समय में मुसीबत आर्थिक रूप से भी बढ़ गई है.रेल सुधार संघर्ष समिति का आरोप है कि कोरोना के समय देश के और भी रूट पर ट्रेन बंद की गई थी लेकिन उनको बहाल कर दिया गया है जबकि बुंदेलखंड के साथ पक्षपात किया जा रहा है. अब तक बुंदेलखंड के इस महत्वपूर्ण रेलवे ट्रैक पर कई प्रमुख ट्रेनों को पुनः शुरू नहीं किया जा सका.
जो ट्रेन है बंद है उसमें वह प्रकार है
19809/19810 जबलपुर-कोटा एक्सप्रेस (नियमित) 04189/04190 जबलपुर-खजुराहो एक्सप्रेस (त्रि-साप्ताहिक) 01707/01708 जबलपुर-अटारी एक्सप्रेस 11701/11702 जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस (त्रि-साप्ताहिक) 22895/22896 दुर्ग-फिरोजपुर दीनदयाल अंत्योदय एक्सप्रेस
14719/14720 बीकानेर-बिलासपुर साप्ताहिक दीनदयाल अंत्योदय एक्सप्रेस 51603/51604 बीना-कटनी पैसेंजर (नियमित)बीना-कटनी के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को भी बंद किए जाने से छोटे स्टेशनों और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है. समिति का कहना है कि इस तरह की नियमित पैसेंजर ट्रेनें नौकरी, व्यवसाय, इलाज, शिक्षा और रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले यात्रियों की लाइफ लाइन होती हैं. इनके बंद होने से यात्रियों को महंगे और असुविधाजनक विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है.पश्चिम मध्य रेल के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव का कहना है कि अधिकांश ट्रेनें शुरू हो चुकी है. यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे द्वारा स्पेश्चल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. जो ट्रेनें बंद हैं, उन्हें मंत्रालय द्वारा शुरू किया जाएगा.
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