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पंडित कल्कि राम के मुताबिक यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. यह एशिया के कुछ हिस्सों में नजर आएगा.भारत में ग्रहण दृश्यमान नहीं होने के कारण यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा.ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व पर भी चंद्रग्रहण का कोई धार्मिक दोष नहीं माना जाएगा. और बहनें सामान्य रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.

अयोध्या: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. कई वर्षों बाद इस बार पूर्णिमा तिथि पर कई अद्भुत संयोग का निर्माण भी हो रहा है. साथ ही इसी दिन पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण भी लग रहा है. ऐसी स्थिति में धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व अधिक हो जाता है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार 28 अगस्त को लगने वाला चंद्रग्रहण करीब 5 घंटे 39 मिनट तक रहेगा. ग्रहण का समय सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है.

5 घंटे 39 मिनट तक रहेगा चंद्रग्रहण

पंडित कल्कि राम के मुताबिक यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. यह एशिया के कुछ हिस्सों में नजर आएगा. भारत में ग्रहण दृश्यमान नहीं होने के कारण यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा. ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व पर भी चंद्रग्रहण का कोई धार्मिक दोष नहीं माना जाएगा. बहनें सामान्य रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.

ग्रहण के बाद स्नान कर मनाएं रक्षाबंधन

हालांकि धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरत सकते हैं. पंडित कल्कि राम का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ग्रहण को देवताओं से जोड़कर धार्मिक रूप से देखता है, तो वह दोपहर 12:31 बजे ग्रहण के मोक्ष के बाद स्नान और ध्यान करके रक्षाबंधन का पर्व मनाए.

ग्रहण काल में इन बातों का रखें ध्यान

ग्रहण काल में परंपरागत रूप से पूजा स्थल का स्पर्श न करने, भोजन से परहेज करने, सोने से बचने और घर में कलह-क्लेश न करने की सलाह दी जाती है. इस दौरान अपने इष्ट देव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करना शुभ माना जाता है. भोजन पहले से बना हो तो उसे ढककर रखने और उसमें तुलसी दल रखने की भी धार्मिक परंपरा है.

भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, नहीं लगेगा सूतक

पंडित कल्कि राम के अनुसार ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. फिर भी श्रद्धालु ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा-पाठ करें और इसके बाद रक्षाबंधन का पर्व मनाएं. 28 अगस्त का दिन पूर्णिमा, चंद्रग्रहण और रक्षाबंधन के संयोग के कारण धार्मिक दृष्टि से खास रहने वाला है. श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई सूतक या दोष मान्य नहीं होगा.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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