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Agriculture tips: खेत में फसल बुवाई के लिए मजदूर ना मिलने पर निराश होने की बजाए आजमगढ़ के किसान अर्जुन मौर्या ने इसका एक जबरदस्त और अनोखा उपाय ढूंढ निकाला. उन्होंने घर में पड़े कबाड़ का इस्तेमाल करते हुए अपनी सूझबूझ से एक ऐसा शानदार देसी जुगाड़ वाली मशीन तैयार कर डाली जिसका उपयोग करते हुए वह आसानी से खेतों में फसल बुवाई का काम कर सकते हैं.
समय के साथ-साथ बढ़ती तकनीक और खेती में इसका उपयोग किसने के लिए बेहद फायदेमंद बनता जा रहा है. खेती जहां इन उपकरणों की मदद से बेहद आसान हो रही है वहीं या किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद हो रही है, लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे किसान भी है जो पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं, फसल बुवाई के लिए गांव के लोगों या मजदूरों पर निर्भर रहते हैं.
बड़ी जोत के खेतों में फसल बोवाई करना कभी-कभी किसानों के लिए बेहद कठिन हो जाता है. इसके लिए अक्सर उनके द्वारा अन्य लोगों की सहायता ली जाती है, ताकि काम को आसानी से पूरा किया जा सके, लेकिन मजदूर ना मिलने की स्थिति में कभी कबार किसानों को बेहद समस्या उठानी पड़ती है. इसी तरह आजमगढ़ के एक किसान ने भी इस समस्या का एक जबरदस्त और बेजोड़ हल निकाला है.
खेत में फसल बुवाई के लिए मजदूर ना मिलने पर निराश होने की बजाए आजमगढ़ के किसान अर्जुन मौर्या ने इसका एक जबरदस्त और अनोखा उपाय ढूंढ निकाला. उन्होंने घर में पड़े कबाड़ का इस्तेमाल करते हुए अपनी सूझबूझ से एक ऐसा शानदार देसी जुगाड़ वाली मशीन तैयार कर डाली जिसका उपयोग करते हुए वह आसानी से खेतों में फसल बुवाई का काम कर सकते हैं.
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ग्रामीण क्षेत्रों में फसल बुवाई के दौरान अक्सर मजदूरों की समस्या देखने को मिलती है. कई बार तो मजदूर ना मिलने के कारण फसल बुवाई में भी देरी हो जाती है और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है. ऐसे में किसान अर्जुन मौर्या ने अपने घर में पड़े हुए लोहे के कबाड़ और पुराने सामान को एकत्रित करते हुए एक जबरदस्त देसी जुगाड़ तैयार किया. इसमें उन्होंने पुराने साइकिल के पहिए बेकार पाइप और लोहे की पत्तियों की मदद से एक शानदार उपकरण तैयार कर डाला.
उन्होंने इन सभी कबाड़े को इकट्ठा करते हुए इन्हें जोड़कर एक ऐसा देसी उपकरण तैयार किया जो बेहद कम मेहनत और आसानी से फसल बुवाई का काम पूरा कर सकता है. जिससे एक अकेला व्यक्ति बीज की बुवाई खेत में बेहद कम मेहनत के आसानी से पूरा कर सकता है. अर्जुन मौर्या मुख्य रूप से तुलसी और फूलों की व्यावसायिक खेती करते हैं.
उन्होंने बताया कि तुलसी के बीज या फूलों की बुवाई के समय लोगों की मदद लेनी पड़ती थी कई बार कोई आता था तो कोई मना कर देता था. इससे उनका काम रुक जाता था और समय की बर्बादी होती थी. इसी समस्या से परेशान होकर उन्होंने सोचा कि एक ऐसा यंत्र बनाया जाए जिससे बुवाई के लिए बार-बार मजदूरों पर निर्भर ना होना पड़े.
इसके बार उन्होंने इन फसलों की बुवाई के लिए इस देसी जुगाड़ वाले यंत्र को तैयार किया जिससे वह आसानी से अपने खेतों में तुलसी व फूलों के बीच की बुवाई कर सकते हैं. अर्जुन मौर्या बताते हैं कि वह किसान होने के साथ-साथ आईटीआई से शिक्षा भी प्राप्त कर चुके हैं उन्हें मशीनों और तकनीक की अच्छी जानकारी है.
उन्होंने अपनी इसी तकनीक और कौशल का उपयोग करते हुए घर में पड़े कबाड़ और लोहे का उपयोग करते हुए अपने लिए यह जबरदस्त और उपयोगी यंत्र तैयार किया जिससे वह अपनी खेती को आसान बना रहे हैं इस यंत्र से न केवल उनका खुद का काम आसान हुआ है बल्कि इसका उपयोग अब आसपास के किसानों द्वारा भी उनसे मांग कर किया जाता है.
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