Last Updated:
Paddy Crop Care : कम बारिश धान किसानों की मुसीबत बढ़ रही है. खेतों में सूखे की वजह से कीटों का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में हिस्पा कीट का प्रकोप ज्यादा दिखाई देने लगा है. यह कीट धान की पत्तियों को मोड़कर अंदर से खाता है, जिससे पौधे की बढ़वार धीमी हो जाती है. ऐसे में किसानों को क्या करना चाहिए, लोकल 18 ने इस बारे में लखीमपुर खीरी के जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह से बात की. वे बताते हैं कि इन दिनों धान की फसल में हिस्पा कीट खतरनाक रूप से बढ़ रहा है. अगर खेत में कीटों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है और किसान समय पर नियंत्रण नहीं करते हैं तो आगे चलकर ज्यादा नुकसान हो सकता है, इसलिए किसानों का सचेत होना जरूरी है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं. खरीफ सीजन में धान यहां की प्रमुख फसलों में शामिल है. बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं. इस बार मानसून के दौरान कई इलाकों में अपेक्षित बारिश नहीं होने और मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण धान की फसल में कई प्रकार के कीटों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है. धान की फसल में हिस्पा कीट किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है.
धान की फसल में हिस्पा कीट का प्रकोप शुरुआती अवस्था में दिखाई देने पर किसानों को समय रहते इसकी रोकथाम शुरू कर देनी चाहिए. अगर खेत में कीटों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है और किसान समय पर नियंत्रण नहीं करते हैं तो आगे चलकर ज्यादा नुकसान हो सकता है. लोकल 18 से लखीमपुर खीरी के जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह बताते हैं कि इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है, इसलिए किसानों का सचेत होना जरूरी है.
हिस्पा धान की फसल का प्रमुख कीट माना जाता है. इसके वयस्क कीट और लार्वा दोनों पौधे को नुकसान पहुंचाते हैं. खेत में इसका प्रकोप होने पर धान की पत्तियों पर सफेद या हल्की पीली धारियां दिखाई देने लगती हैं. धीरे-धीरे पत्तियों का हरा भाग प्रभावित होने लगता है और पत्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं. हिस्पा कीट की पहचान के लिए किसानों को धान की पत्तियों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए.
Add News18 as
Preferred Source on Google
इस बार मौसम में बदलाव का असर धान की फसल पर भी देखने को मिल रहा है. धान को पर्याप्त नमी और अनुकूल वातावरण की जरूरत होती है. जब खेत में नमी की स्थिति प्रभावित होती है और मौसम में लगातार बदलाव हो रहा होता है तो कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है. ऐसे में अगर कीटों पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो किसान घाटे में चले जाते हैं.
धान की फसल को कीटों से बचाने का सबसे बेहतर तरीका है कि किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें. कई बार किसान तब दवा का छिड़काव करते हैं जब कीट काफी अधिक संख्या में फैल चुके होते हैं. ऐसी स्थिति में नियंत्रण में अधिक खर्च हो सकता है और फसल को पहले ही नुकसान हो चुका होता है. कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह कहते हैं कि किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार धान की फसल का निरीक्षण करना चाहिए.
कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के मुताबिक, धान की फसल में हिस्पा कीट का प्रकोप अगर दिखाई दे तो आप कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं. यह कीट धान की पत्तियों को मोड़कर अंदर से खाता है जिससे पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है. इनकी रोकथाम के लिए किसान भाई इमामेक्टिन बेंजोएट 10 SG की 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 20 SC की 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें.
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह बताते हैं कि कीटनाशक का छिड़काव करते समय किसान हवा की दिशा का ध्यान रखें. छिड़काव के दौरान हाथ में दस्ताने, चेहरे पर मास्क और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें. किसानों में अक्सर यह धारणा रहती है कि दो या तीन कीटनाशकों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने से कीट जल्दी खत्म हो जाएंगे. ऐसा करना कई बार फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



