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सिमरन/नितिन राजपूत/सचिन कुमार, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir

Updated Tue, 11 Aug 2026 11:34 AM IST

एम्स दिल्ली के गेट नंबर एक और छह के बाहर रविवार रात करीब आठ बजे फुटपाथ पर करीब 40 लोग कतार में खड़े थे। सभी को सोमवार सुबह ओपीडी की पर्ची लेनी थी, इसलिए शाम से ही लाइन में लग गए थे। मध्यरात्रि तक संख्या करीब 100 और रात 1:30 बजे तक करीब 300 पहुंच गई। किसी ने चादर बिछा ली, तो कोई फुटपाथ पर बैठकर सुबह होने का इंतजार करता रहा।


ग्राउंड रिपोर्ट
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

किसी के कंधे पर बीमार मां-बाप थे तो किसी की गोद में बच्चे, और सबकी आंखों में इलाज की उम्मीद। देश के नामचीन एम्स में इलाज की पहली सीढ़ी, ओपीडी की पर्ची तक पहुंचने के लिए उन्हें शाम आठ बजे से सुबह आठ बजे तक इंतजार करना पड़ा। रात गुजर गई, लेकिन कतार खत्म नहीं हुई। बारिश में लोगों ने बोतल, रुमाल और कागज से अपनी जगह बचाई। सफदरजंग में भी हालात अलग नहीं थे। मरीजों की पीड़ा समझने के लिए अमर उजाला संवाददाता सिमरन व नितिन राजपूत और संवाद न्यूज एजेंसी के सहयोगी सचिन कुमार ने पूरी रात इनके बीच गुजारी। वह इसलिए भी कि देश के बड़े अस्पतालों की तरफ उम्मीद भरी नजर पूरे देश की रहती है…


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