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India First: भारतीय सिनेमा का इतिहास एक सदी से भी ज्यादा पुराना है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली महिला फिल्म निर्देशक कौन थीं? उनका नाम फातिमा बेगम था. उन्होंने एक्टिंग करने के साथ-साथ कई सफल फिल्मों का निर्देशन भी किया.

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भारतीय सिनेमा की पहली महिला निर्देशक कौन, क्या जानते हैं उनका नाम?Zoom

India First: क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा की पहली महिला फिल्म निर्देशक कौन थीं? आज जब जोया अख्तर, मेघना गुलजार और किरण राव जैसी महिला निर्देशक अपनी फिल्मों से नई पहचान बना रही हैं, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर भारतीय फिल्मों में निर्देशन की कमान सबसे पहले किस महिला ने संभाली थी. इसका जवाब है- फातिमा बेगम. फातिमा, केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया की पहली महिला फिल्म निर्देशक और अपनी फिल्म कंपनी स्थापित करने वाली पहली महिला फिल्मकार भी मानी जाती हैं. जब बीसवीं सदी के शुरुआती दशक में मूक फिल्में बननी शुरू हुईं, तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना आसान नहीं माना जाता था. उस दौरान महिला का किरदार पुरुष कलाकार निभाते थे. लेकिन इस माहौल में फातिमा बेगम ने न सिर्फ अभिनय किया, बल्कि कैमरे के पीछे खड़े होकर निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली. साल 1926 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म निर्देशित कर भारतीय सिनेमा के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया.

फातिमा बेगम का जन्म साल 1892 में एक उर्दू भाषी मुस्लिम परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत उर्दू और गुजराती रंगमंच से की थी. इसके बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया और 1922 में फिल्मकार अर्देशिर ईरानी की मूक फिल्म वीर अभिमन्यु से बड़े पर्दे पर कदम रखा. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय ने उन्हें जल्द ही मूक सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया. हालांकि, फातिमा बेगम की इच्छा सिर्फ एक्टिंग करने तक सीमित नहीं थी. वे कहानियां गढ़ना, उन्हें पर्दे पर अपने नजरिए से प्रस्तुत करना और फिल्म निर्माण का हिस्सा बनना चाहती थीं. इसी सोच के साथ उन्होंने 1926 में फातिमा फिल्म्स नाम से अपनी प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की, जिसे बाद में विक्टोरिया-फातिमा फिल्म्स के नाम से जाना गया. उस दौर में किसी महिला का अपना फिल्म स्टूडियो स्थापित करना अपने आप में एक साहसिक कदम था. इसी बैनर के तहत उन्होंने ‘बुलबुल-ए-परीस्तान’ का निर्माण और निर्देशन किया. यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की पहली फीचर फिल्म मानी जाती है, जिसका निर्देशन किसी महिला ने किया था.

खास बात यह थी कि फातिमा बेगम ने केवल निर्देशन ही नहीं किया, बल्कि फिल्म की कहानी लिखने और निर्माण की जिम्मेदारी भी संभाली. इस तरह उन्होंने साबित किया कि महिलाएं केवल पर्दे पर अभिनय ही नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण के हर क्षेत्र में नेतृत्व की क्षमता रखती हैं. ‘बुलबुल-ए-परीस्तान’ अपने समय की एक फंतासी फिल्म थी, जिसमें परियों, जादुई दुनिया और रहस्यमयी घटनाओं को पर्दे पर जीवंत किया गया था. उस दौर में फिल्म निर्माण की तकनीक काफी सीमित थी, लेकिन फातिमा ने कैमरे की ट्रिक्स और स्पेशल इफेक्ट्स का प्रयोग कर दर्शकों को अलग अनुभव देने की कोशिश की. इसका असर यह हुआ कि फिल्म सुपरहिट हुई थी. ‘बुलबुल-ए-परीस्तान’ के बाद फातिमा ने चंद्रवली (1928), हीर रांझा (1928), शकुंतला (1929) और गॉडेस ऑफ लक (1929) जैसी कई फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया. इन फिल्मों ने उन्हें उस दौर की सबसे प्रभावशाली महिला फिल्मकारों में शामिल कर दिया. अभिनेत्री, लेखिका, निर्माता और निर्देशक के रूप में उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बेटियों को भी फिल्म जगत से जोड़ा
वो दौर ऐसा था, जहां लोग खुद तो फिल्मों में काम करते थे, लेकिन अपने परिवार के महिला सदस्यों को इससे दूर रखते थे. लेकिन फातिमा बिल्कुल अलग सोच रखती थीं. उन्होंने अपनी तीनों बेटियों जुबैदा, सुल्ताना और शहजादी को भी फिल्म इंडस्ट्री में से जोड़ा. इनमें जुबैदा भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा की मुख्य अभिनेत्री बनीं. इस तरह मां और बेटी, दोनों ने भारतीय सिनेमा के दो अलग-अलग ऐतिहासिक पड़ावों से अपना नाम हमेशा के लिए जोड़ लिया. बोलती फिल्मों का दौर शुरू होने के बाद भी फातिमा बेगम ने अभिनय जारी रखा. उन्होंने सेवा सदन (1934) और दुनिया क्या है (1938) जैसी फिल्मों में भी काम किया. लगभग डेढ़ दशक तक फिल्म उद्योग में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली. साल 1983 में 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. हालांकि, उस दौर की अधिकांश फिल्मों की तरह फातिमा बेगम की निर्देशित फिल्मों के मूल प्रिंट और निगेटिव भी समय के साथ सुरक्षित नहीं रह सके. इसलिए आज उनकी फिल्मों को देख पाना संभव नहीं है.

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Niranjan DubeySr. Associate Editor

निरंजन दुबे हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं. प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव. वर्तमान में News18 हिंदी में Sr. Associate Editor के पद पर कार्यरत हैं और मध्य प्रदेश…

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