Jodhpur Sawan Festival: सावन के आगमन के साथ राजस्थान के जोधपुर में मौसम के साथ बाजारों और गलियों की रंगत भी बदल गई है. हरियाली और बारिश के बीच सावन की पारंपरिक रौनक देखने को मिल रही है. महिलाओं के बीच हरी चूड़ियों का खास आकर्षण बना हुआ है, वहीं जगह-जगह झूले सावन की मस्ती को बढ़ा रहे हैं. राजस्थानी संस्कृति की पहचान लहरिया और बांधनी के रंग-बिरंगे परिधानों की भी बाजारों में खूब मांग देखने को मिल रही है. सावन के गीत, झूलों की मस्ती और पारंपरिक परिधानों ने शहर के माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया है. जोधपुर की यह रंगीन सावनी छटा लोगों को खूब आकर्षित कर रही है.
जोधपुर: सावन यानी हरियाली, उमंग और उत्साह का महीना बारिश की बूंदों के साथ प्रकृति जब हरे रंग की चादर ओढ़ती है, तो इसका असर बाजारों और घरों में भी नजर आने लगता है. राजस्थान में सावन का रंग कुछ और ही खास होता है और बात अगर जोधपुर की हो तो यहां मेहरानगढ़ की पहाड़ियों के आसपास छाई हरियाली, मंदिरों में गूंजते भोलेनाथ के जयकारे और बाजारों में सजे रंग-बिरंगे लहरिया-बांधनी के कपड़े सावन की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं. महिलाओं के लिए सावन सिर्फ पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि सजने-संवरने, झूले झूलने, तीज मनाने और अपनी परंपराओं से जुड़ने का भी खास अवसर है. जोधपुर में सावन के इस रंग को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
मीनाक्षी जैन, ने बताया कि जोधपुर में सावन आते ही जोधपुर के आसपास का प्राकृतिक नजारा भी बदल जाता है. मेहरानगढ़ किले के आसपास की हरियाली सावन में अलग ही खूबसूरती बिखेरती है. महिलाएं मंदिरों में दर्शन के साथ झूलों और सावन से जुड़ी परंपराओं का आनंद ले रही हैं. वहीं जोधपुर की मशहूर मिठाइयों में शामिल घेवर भी सावन के महीने में खास महत्व रखता है. यानी सावन यहां प्रकृति, आस्था और खान-पान तीनों को एक साथ जोड़ता नजर आता है.
हरी चूड़ियों से जुड़ी खास मान्यता
सावन के महीने में हरे रंग का अपना अलग महत्व माना जाता है. खासतौर पर महिलाओं के बीच हरी चूड़ियां और हरे रंग के परिधान सावन की पहचान बन जाते हैं. कई महिलाएं सावन में माता पार्वती को हरी चूड़ियां अर्पित करती हैं और पति की ओर से हरी चूड़ियां या उपहार मिलने को भी शुभ मानती हैं. यही वजह है कि सावन में बाजारों में हरी चूड़ियों और रंग-बिरंगे श्रृंगार की मांग भी बढ़ जाती है.
सोमवार के व्रत से तीज तक आस्था का रंग
ट्विंकल जैन ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए भी बेहद खास माना जाता है. सोमवार के व्रत, शिवलिंग पर जलाभिषेक और मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ महिलाएं सावन से जुड़े पर्व और तीज की तैयारियों में भी जुट जाती हैं. ऐसे में सावन उनके लिए आस्था, परंपरा और उत्सव का संगम बन जाता है.
लहरिया-बांधनी ने सजाया सावन का बाजार
ज्योति ने बताया कि सावन की बात हो और राजस्थान के लहरिया-बांधनी रंगों का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. जोधपुर के बाजारों में इन दिनों रंग-बिरंगी साड़ियों और पारंपरिक परिधानों की खास रौनक देखने को मिल रही है. लहरिया के अलग-अलग रंग और बांधनी की वैरायटी महिलाओं को खूब आकर्षित कर रही है. सावन के मौके पर महिलाएं अपनी पसंद के रंग और डिजाइन की साड़ियां खरीदने बाजार पहुंच रही हैं, जिससे दुकानदारों में भी उत्साह है.
भाविका ने बताया कि सावन ने जोधपुर को सिर्फ हरियाली ही नहीं, बल्कि रंगों, आस्था और उत्सव से भी सराबोर कर दिया है. मेहरानगढ़ की हरियाली से लेकर मंदिरों की घंटियों तक, हरी चूड़ियों से लेकर लहरिया-बांधनी की रंगीन साड़ियों तक और सावन के खास घेवर तक सूर्यनगरी में सावन का अंदाज वाकई कुछ अलग ही नजर आ रहा है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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