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श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक दिन भगवान शिव की भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। जब सावन मास का 10वां दिन शनिवार को पड़ता है, तो यह एक अद्भुत और दुर्लभ संयोग निर्मित करता है। शनिवार का दिन भगवान शिव के परम भक्त और न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित होता है। मान्यता है कि जो भक्त शनिवार के दिन सावन में भगवान शिव की आराधना करते हैं, उन पर महादेव के साथ-साथ शनिदेव की विशेष कृपा भी बरसती है और शनि दोष (साढ़े साती या ढैय्या) के प्रभाव शांत होते हैं।

 

1. महामृत्युंजय मंत्र (कष्टों, रोगों और शनि दोष से मुक्ति हेतु)

शनिवार को शिवजी के इस मंत्र का जाप करने से शनि से जुड़ी पीड़ाएं दूर होती हैं।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

 

2. शिव-शनि कृपा मंत्र (शनिदेव और महादेव का संयुक्त ध्यान)

यह मंत्र भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ शनिदेव के प्रतिकूल प्रभाव को शांत करता है।

ॐ नमः शिवाय।

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

 

3. रुद्र गायत्री मंत्र (सुख-समृद्धि और मानसिक शांति हेतु)

मानसिक तनाव और कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप करें।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

4. पंचाक्षरी शिव मंत्र (सरल और अत्यंत प्रभावशाली)

यदि आपके पास अधिक समय न हो, तो केवल इस सरल मंत्र का 108 बार जाप करें।

ॐ नमः शिवाय

 

प्रातःकाल स्नान व संकल्प:

सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचें। साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनकर व्रत व पूजा का संकल्प लें।

शिवलिंग का जलाभिषेक:

  • पास के शिव मंदिर जाएं और तांबे या पीतल के लोटे में जल, थोड़ा सा गंगाजल और काला तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर काले तिल, शमी के पत्ते, बेलपत्र, धतूरा और नीले आंकड़े के फूल विशेष रूप से अर्पित करें। (शनिवार को शमीपत्र और काला तिल चढ़ाने से शनिदेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं)।

 

पीपल के वृक्ष का पूजन:

शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। पीपल में भगवान शिव और विष्णु जी का वास माना जाता है, इसलिए इसकी परिक्रमा करने से सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।

दान-पुण्य:

पूजा के बाद किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल, या काले वस्त्रों का दान करें।
 

शनिवार के दिन ध्यान रखने योग्य बातें

  • शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय अपनी दृष्टि शिवलिंग की जलधारा पर रखें और शांत मन से मंत्रों का जाप करें।
  • किसी का अनादर या छल-कपट न करें, क्योंकि शनिदेव कर्मफल दाता हैं और सावन में सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य है।
  • शाम को शिव चालीसा और शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें।

 

शनिवार के दिन पूजा एवं जप की विशेष विधि:

समय: प्रातःकाल स्नान के बाद या संध्याकाल के समय यह जाप करें।

दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

माला: जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है।

विशेष सामग्री: शनिवार को शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें और शमी के पत्ते या बेलपत्र चढ़ाएं।

 

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