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नई दिल्ली. व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी ने अब अपना ध्यान रेड-बॉल यानी लाल गेंद के क्रिकेट पर केंद्रित कर दिया है. यूके और जिम्बाब्वे दौरे से लौटने के बाद वैभव आगामी घरेलू सत्र और प्रतिष्ठित दलीप ट्रॉफी 2026-27 के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं. रेड बॉल से लंबे प्रारूप में अपनी छाप छोड़ने के लिए वह नागपुर के पास तलेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स अकादमी में जमकर पसीना बहा रहे हैं.

दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े मल्टी-डे टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए राजस्थान रॉयल्स ने अपने खिलाड़ियों के लिए 10 दिवसीय स्पेशल ट्रेनिंग शिविर का आयोजन किया है. वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi)  यहां भारत के पूर्व बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर की देखरेख में अपनी तकनीक और रेड-बॉल क्रिकेट के संयम को तराश रहे हैं. इस कैंप में उनके साथ तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, शुभम दुबे, रवि सिंह और सुशांत मिश्रा जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं. व्हाइट-बॉल क्रिकेट से रेड-बॉल क्रिकेट में ढलना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होता, लेकिन वैभव का पूरा ध्यान क्रीज पर टिकने, गेंद को देर से खेलने और लंबी पारियां खेलने की कला सीखने पर है.

ईस्ट जोन के उप-कप्तान नियुक्त, ईशान किशन के साथ संभालेंगे कमान
वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता पर चयनकर्ताओं ने गहरा भरोसा जताया है. ईस्ट ज़ोन (East Zone) की टीम में उन्हें उप-कप्तान बनाया गया है, जहां वे कप्तान ईशान किशन के साथ मिलकर टीम की कमान संभालेंगे. रणजी ट्रॉफी में बिहार के उप-कप्तान रह चुके वैभव के लिए यह अपनी परिपक्वता साबित करने का सुनहरा मौका है. ईस्ट जोन अपने दलीप ट्रॉफी अभियान की शुरुआत 23 अगस्त से नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ मैच से करेगा.

दलीप ट्रॉफी में होगा वैभव की क्षमता का असली टेस्ट
टी-20 और वनडे प्रारूप में अपने छक्कों से दुनिया को चौंकाने वाले वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दलीप ट्रॉफी सत्र एक नया मोड़ साबित हो सकता है. क्या वह टी-20 की आक्रामकता के साथ लाल गेंद से धैर्य का संतुलन बना पाएंगे? क्या वह चयनकर्ताओं की उम्मीदों पर खरे उतरकर भारतीय टेस्ट टीम का दरवाजा खटखटाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब 23 अगस्त से शुरू होने वाले इस रेड-बॉल संग्राम में मिलेंगे.

सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में रणजी ट्रॉफी खेलने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं
बिहार के लिए 5 जनवरी 2024 को पटना में मुंबई के खिलाफ महज 12 साल और 284 दिन की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू करने वाले वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में रणजी ट्रॉफी खेलने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने थे. अब तक खेले 8 प्रथम श्रेणी मुकाबलों की 12 पारियों में वैभव ने 90 के असाधारण स्ट्राइक रेट से 207 रन बनाए हैं, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 93 रन रहा है. नवंबर 2025 में मेघालय के खिलाफ पटना में उन्होंने सिर्फ 33 गेंदों में अपनी पहली प्रथम श्रेणी फिफ्टी जड़ी थी और 67 गेंदों पर 93 रनों की पारी खेली, हालांकि वह रणजी इतिहास में सबसे युवा शतकवीर बनने से केवल 7 रन से चूक गए.

रेड-बॉल में उनका प्रदर्शन इंडिया अंडर-19 के यूथ टेस्ट मुकाबलों में और बेहतर रहा है, जहां उन्होंने 6 मैचों में 33.10 की औसत से 331 रन बनाए हैं और 2 शतक जड़े हैं. सितंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ चेन्नई में 58 गेंदों में जड़ा उनका शतक इस प्रारूप में किसी भी भारतीय द्वारा बनाया गया सबसे तेज शतक है, जबकि दूसरा शतक (113 रन) उन्होंने 2025 में ब्रिस्बेन में उसी टीम के खिलाफ बनाया था.

वैभव का प्रदर्शन विदेशों में अच्छा रहा है
आंकड़ों के नजरिए से वैभव का प्रदर्शन विदेशों में काफी दिलचस्प रहा है, जहां वे उछाल वाली पिचों पर अधिक सफल दिखे हैं. ऑस्ट्रेलिया में उनका औसत 44.33 और भारत में 36.00 रहा है, लेकिन गेंद के अधिक स्विंग होने वाली इंग्लैंड की परिस्थितियों में दो यूथ टेस्ट मैचों में उनका औसत गिरकर 22.50 ही रह जाता है. ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ उनका औसत 40.16 रहा है, जो इंग्लैंड अंडर-19 (22.50) की तुलना में बहुत बेहतर है. 23 अगस्त से बेंगलुरु में शुरू हो रही दलीप ट्रॉफी वैभव सूर्यवंशी की लाल गेंद से क्षमता की अब तक की सबसे कठिन परीक्षा होगी, जहां गेंदबाजी का स्तर रणजी से भी ऊंचा होगा.

मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार जैसे अनुभवी अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों की मौजूदगी वाली टीम में अभिमन्यु ईश्वरन के साथ ओपनिंग करते हुए वैभव यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि लंबे प्रारूप में भी उनका खेल उनके व्हाइट-बॉल के धमाकेदार आंकड़ों की तरह ही असरदार है.

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