Organic Waste Series-4: कचरे से खाद या बायोगैस प्लांट लगाने पर सरकार सब्सिडी देती है. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी, राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम और गोवर्धन जैसी कई योजनाएं हैं जो न केवल वित्तीय मदद देती हैं, बल्कि उद्योग को स्थापित करने के लिए अन्य तरह की सहायता भी करती हैं. वहीं राज्य जैसे महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश भी कचरा प्रबंधन में अलग से सब्सिडी देते हैं.
Organic Waste series-3: कचरे से कमाना है पैसा, प्लांट लगाना कितना आसान, क्या नगरपालिका मदद करती है?
गीले कचरे पर News18hindi की महासीरीज की चौथी कहानी में आज पढ़िए कि क्या कचरे से खाद बनाने या बायोगैस बनाने का प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कोई सब्सिडी मिलती है? क्या राज्य सरकारें भी अलग से सब्सिडी या आर्थिक मदद देती हैं? कौन-कौन सी योजनाओं से ले सकते हैं लाभ? CEEW की एक्सपर्ट प्रियंका सिंह से जानते हैं…
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह बताती हैं कि जैविक कचरा प्रबंधन में अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग संस्थाएं काम कर रही हैं. सीईईडब्ल्यू के अध्ययन के अनुसार, जैविक कचरा प्रबंधन में भारत में नौ कार्यक्रमों, 3 नीतिगत दिशा-निर्देशों और सात योजनाओं के माध्यम से फिलहाल लगभग 16 मंत्रालय और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी, राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम और गोवर्धन (GOBARdhan) जैसी योजनाओं ने कचरे को सिर्फ निपटाने की जगह इसका इस्तेमाल एक संसाधन की तरह करने और उसे आय के जरिया में बदलने के नजरिए को बढ़ावा दिया है.
जैविक कचरे का प्लांट लगाने के लिए सरकार सब्सिडी भी देती है.
इस दिशा में एक प्रमुख आर्थिक प्रोत्साहन ‘सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस’ (CFA) है, जो एनएनआरई की ओर से बायोगैस प्लांट लगाने के लिए दिया जाता है. इसके अलावा, अगर कोई कंपोस्ट खाद बनाने का प्लांट लगाना चाहता है तो जैविक उर्वरकों के लिए ‘सतत’ (SATAT), ‘गोवर्धन’ और ‘मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस’ (MDA) जैसी आर्थिक सहायता योजनाएं चल रही हैं. ये योजनाएं भले ही डायरेक्ट फाइनेंशियल मदद या अनुदान न देती हों लेकिन इस कारोबार के लिए अनुकूल बाजारिक स्थितियां और बेहतर जुड़ाव में सहायक नीतिगत वातावरण को तैयार करती हैं.ताकि अगर कोई कंपोस्ट बनाने का काम शुरू करता है तो उसे रास्ते में बाधाएं न मिलें और वह इसमें आसानी से आगे बढ़ सके.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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