सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ट्रस्ट ने करीब 1,800 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और 400 करोड़ रुपये जमीन खरीद पर खर्च किए हैं. सभी भुगतान बैंकिंग व्यवस्था के जरिए किए गए हैं और कोई भी नकद (कैश) लेन-देन नहीं हुआ.
सरकार का कहना है कि ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी खर्च तय नियमों और बैंकिंग प्रोटोकॉल के तहत किए गए हैं. इसलिए बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि चोरी सिर्फ कैश की छंटाई के दौरान हुई है.
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