Kashi Vishwanath Temple Mystery: काशी विश्वनाथ मंदिर केवल भगवान शिव की आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं बल्कि कई धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा है. मंदिर के स्वर्ण शिखर पर श्रीयंत्र, चार विशेष द्वार, ईशान कोण में विराजमान बाबा विश्वनाथ और शिव-शक्ति के एक साथ दर्शन इस धाम को खास बनाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी को भगवान शिव का निवास और मोक्ष की नगरी माना जाता है.
काशी विश्वनाथ के धाम में उनके स्वर्ण शिखर का दर्शन हर कोई करता है, लेकिन यह शिखर आम मंदिरों के शिखर से बिल्कुल अलग है. मुख्य शिखर के ऊपर बना गुम्बद श्रीयंत्र से मंडित है. मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के बाद जब आप शिखर के ऊपरी हिस्से की ओर देखेंगे तो आपको इसका अहसास भी होगा. इस श्रीयंत्र को तंत्र साधना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
शिखर के अलावा काशी विश्वनाथ के मुख्य मंदिर में प्रवेश के चार द्वार हैं. यह द्वार भी तंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है. अलग-अलग द्वार अलग-अलग चींजों को प्रदर्शित करता है. पहला शांति, दूसरा कला, तीसरा प्रतिष्ठा और चौथा निवृत द्वार है. इस धाम में भक्तों को शिव और शक्ति दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं. पूरे दुनिया में यह इकलौता ऐसा धाम है.
धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त यम चारों द्वार के दर्शन करता है. उसके जीवन में जैसी भी ऊपरी बाधा हो वो सब समाप्त हो जाती है. इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव मध्य भाग नहीं बल्कि ईशान कोण में विराजमान हैं. यह स्थान सम्पूर्ण विद्या और कला से परिपूर्ण माना जाता है. यही वजह है की यहां तंत्र साधक यहां तंत्र के दस महा विद्याओं को जागृत करते हैं.
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मंदिर में प्रवेश के जो चार द्वार है उनमें से दक्षिण से उत्तर की ओर यदि आप प्रवेश करेंगे तो इससे आप बाबा का अघोर रूप का दर्शन पाते हैं. तंत्र साधक इसी द्वार से बाबा के दर्शन में रुचि रखते हैं. हालांकि, इस रहस्य को कम ही लाग जानते हैं.
काशी विश्वनाथ का स्वयम्भू शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है. बाएं भाग में महादेव और दाहिने भाग में मां भगवती भक्तों के कल्याण के लिए विराजमान हैं. इसलिए इस स्थान को मुक्ति या मोक्ष का क्षेत्र भी कहा जाता है. यहां मृत्यु के बाद खुद भगवान शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मनुष्य को सभी योनियों से मुक्ति मिल जाता है.
काशी के पुराधिपति बाबा विश्वनाथ हैं यानी यहां वो राजा स्वरूप में विराजमान हैं. रात में श्रृंगार आरती के समय बाबा का राज राजेश्वर रूप में श्रृंगार होता है. सावन के महीने के प्रत्येक सोमवार को इसी आरती के दौरान भगवान शिव के अलग अलग स्वरूपों के दर्शन भी मिलते हैं. अर्धनारीश्वर स्वरूप की झांकी भी इसी महीने में साल में केवल एक बार भक्तों को मिलता है.
बाबा विश्वनाथ का यह शहर उनके त्रिशूल पर बसा है.इसलिए काशी को अविनाशी कहा जाता है.धार्मिक कथाओं के अनुसार जब भी दुनिया में प्रलय होता है उसका असर यहां नहीं होता है.क्योंकि यहां भगवान शिव खुद भक्तों की रक्षा के लिए विराजमान है.
काशी में भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. वहीं मां भगवती अन्नपूर्णा स्वरूप में यहां रहने वालों का पेट भरती हैं. कहते हैं काशी में माता अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से ही कोई भी भक्त भूखा नहीं सोता है. इसके लिए बाबा विश्वनाथ ने खुद माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी कि उनके काशी में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे.
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