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होमताजा खबरकृषिएक फल का गूदा सड़ाता, दूसरा करता छेद…अमरूद के लिए ये 2 कीट जानी दुश्मन

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Guava Farming Tips : अमरूद में इन दिनों फल आने लगे हैं. यही समय कीटों के आतंक का है. अमरूद की फसल को फल मक्खी और फ्रूट बोरर से सबसे ज्यादा खतरा रहता है. मादा मक्खी फल में अंडे देकर गूदे को सड़ा देती है. इससे बचने के लिए किसान रासायनिक कीटनाशकों की जगह जैविक उपाय अपना सकते हैं. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि फ्रूट बोरर फल को भेदकर उसमें छेद कर देता है. डॉ. हादी बताते हैं कि अमरूद के बागानों में फल मक्खी का प्रकोप सबसे अधिक तब होता है जब फल थोड़े बड़े और गूदेदार होने लगते हैं.

शाहजहांपुर. अमरूद की खेती करने वाले किसानों के लिए फल मक्खी और फल भेदक कीट का प्रकोप बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है. जब अमरूद के फल थोड़े बड़े होते हैं, तब कीटों का हमला शुरू हो जाता है, जिससे फल अंदर से सड़ने लगते हैं और बाजार में उनका सही मूल्य नहीं मिल पाता है. किसानों को इस भारी आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने जैविक और पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते सही फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल कर किसान अपनी फसल को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि अमरूद में अक्सर फल मक्खी यानी फ्रूट फ्लाई और फ्रूट बोरर की समस्या देखी जाती है.

बुरादे जैसा पदार्थ

डॉ. हादी के मुताबिक, मादा मक्खी अमरूद के फल थोड़े बड़े होने पर ओविपोसिटर (Ovipositor) की मदद से फल के अंदर अंडे देती है. ये अंडे धीरे-धीरे सूंडी या गभ (Grub) में बदल जाते हैं, जो फल के गूदे को खाकर उसे पूरी तरह नष्ट कर देते हैं. फ्रूट बोरर फल को भेदकर उसमें छेद कर देता है, जिससे लकड़ी के बुरादे जैसा पदार्थ निकलता है. इससे फल लसलसा और बेकार हो जाता है. ऐस में किसान इससे बचाव के लिए मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप (Methyl Eugenol Trap) और क्योर ल्योर (Cue Lure) फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग करें.

कब होता है ज्यादा अटैक

डॉ. हादी बताते हैं कि अमरूद के बागानों में फल मक्खी का प्रकोप सबसे अधिक तब होता है जब फल थोड़े बड़े और गूदेदार होने लगते हैं. इस कीट की मादा मक्खी अपने शरीर के पिछले हिस्से में मौजूद विशेष अंग, जिसे ओविपोसिटर (Ovipositor) कहते हैं, के माध्यम से फल की ऊपरी त्वचा के नीचे अंडे जमा कर देती है. बाहर से देखने पर फल सामान्य लग सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर कीट का विकास शुरू हो जाता है. मक्खी द्वारा दिए गए अंडे समय के साथ धीरे-धीरे पकते हैं और बेलनाकार सूंडी में तब्दील हो जाते हैं. यह सूंडी अमरूद के आंतरिक गूदे को लगातार खाता रहता है. कीट के इस तरह गूदा खाने से अमरूद अंदर से लसलसा, पिलपिला और बदबूदार हो जाता है. इस प्रकार फल पूरी तरह सड़कर खराब हो जाता है.

फ्रूट बोरर कितना घातक

डॉ. हादी बताते हैं कि फल मक्खी के साथ-साथ अमरूद में ‘फ्रूट बोरर’ कीट की समस्या भी देखी जाती है. यह कीट अमरूद के फल को बाहर से छेदता है. फल में छेद होने के बाद उससे लकड़ी के बुरादे जैसा पदार्थ बाहर निकलता दिखता है. ऐसे कीटग्रस्त और क्षत-विक्षत अमरूद की बाज़ार में मांग पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिससे अमरूद की मार्केट वैल्यू गिर जाती है और किसानों को भारी घाटा सहना पड़ता है. रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और फसल की सुरक्षा के लिए जैविक उपाय सबसे कारगर हैं. अमरूद के बाग में मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप (Methyl Eugenol Trap) का इस्तेमाल करना चाहिए. फल मक्खी को आकर्षित कर नष्ट करने के लिए फेरोमोन आधारित क्योर ल्योर (Cue Lure) ट्रैप लगाना बेहद फायदेमंद है. इससे बिना किसी जहरीले रसायन के कीटों पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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