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Pellet Gun Row: जंतर-मंतर पर ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल को लेकर जारी विवाद के बीच सीआरपीएफ प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जवानों को बड़ा मैसेज दिया है. उन्होंने कहा कि यदि जवान अपनी ड्यूटी ईमानदारी और सद्भावना से निभाते हैं तो किसी तरह का डर न रखें, उनकी कार्रवाई की जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे. यह बयान ऐसे समय आया है जब आंदोलन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज है. CRPF का कहना है कि रैपिड एक्शन फोर्स ने मानक संचालन प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से गैर-घातक हथियारों का उपयोग किया.
जंतर-मंतर पैलेट गन विवाद के बीच सीआरपीएफ प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जवानों से कहा कि बिना डर के ड्यूटी करें, कार्रवाई की जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक को लेकर CJP और छात्रों का दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन हुआ. इस दौरान पुलिस और CRPF के जवानों पर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप लगा. इसकी बात लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी उठाया. अब इस पर बवाल के बीच CRPF प्रमुख का एक बयान अचानक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. इसी बीच CRPF महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अपने जवानों के सामने ऐसा संदेश दिया, जिसने साफ कर दिया कि सुरक्षा बलों का शीर्ष नेतृत्व अपने कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ा है. उन्होंने जवानों से कहा कि ड्यूटी निभाते समय किसी तरह का डर मन में न रखें. यदि उन्होंने ईमानदारी और नियमों के तहत कार्रवाई की है तो उसकी जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे. ऐसे समय में आया यह मैसेज इसलिए भी अहम है क्योंकि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं और सुरक्षा बलों की भूमिका भी चर्चा में है. सीआरपीएफ प्रमुख का यह बयान केवल जवानों का मनोबल बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि यह भी बताता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान लिए गए फैसलों पर नेतृत्व की जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण होती है.
प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन से फायर करने के मामले में नया मोड़ आ गया है. (फोटो: पीटीआई)
CRFP प्रमुख ने जवानों को दिया भरोसे का संदेश
- CRFP के अलंकरण समारोह में महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘CRFP के महानिदेशक के रूप में मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि चाहे वह ऑपरेशनल बटालियन हो या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी, आप अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सद्भावना के साथ जो भी निर्णय लेंगे और जो भी कार्रवाई करेंगे, उन सभी निर्णयों और कार्रवाइयों की जिम्मेदारी मैं लेता हूं. बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभाते रहिए. जहां भी जिम्मेदारी या जवाबदेही तय होगी, उसे मैं CRFP के महानिदेशक के रूप में स्वीकार करूंगा.’
- दिल्ली पुलिस के अनुसार 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई. पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए. इसके बाद प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल की खबरें सामने आने पर मामला राजनीतिक विवाद बन गया.
- अधिकारियों के मुताबिक रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले कम तीव्रता वाले उपाय अपनाए. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी, तब चरणबद्ध तरीके से गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टियर स्मोक ग्रेनेड, एंटी-रायट गन से दो राउंड और प्लास्टिक पैलेट के दो राउंड दागे गए.
SOP के तहत हुई कार्रवाई का दावा
CRFP की पोस्ट-इवेंट समीक्षा के अनुसार RAF ने भीड़ नियंत्रण के दौरान निर्धारित ‘फोर्स ग्रेडिएंट’ का पालन किया. समीक्षा में कहा गया कि पंप एक्शन गन से प्लास्टिक पैलेट तभी दागे गए जब कम तीव्रता वाले उपायों से भीड़ नहीं हटी. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की अनुमति और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप की गई.
36 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर धरना देने के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की. संगठन का दावा है कि केंद्र सरकार ने उसकी कई प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं. इनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने, प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार करने का आश्वासन शामिल है.
RAF ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले कम तीव्रता वाले उपाय अपनाए. (फाइल फोटो PTI)
अब राजनीतिक बहस और तेज
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार और सुरक्षा बलों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल स्वीकृत और गैर-घातक उपायों का इस्तेमाल किया गया. ऐसे माहौल में CRFP प्रमुख का बयान सुरक्षा बलों के मनोबल और नेतृत्व की जवाबदेही दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कल बुधवार को भी लोकसभा में इसे लेकर भारी हंगामा हुआ था.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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