Image Slider

Last Updated:

Sikar Success Story: सीकर की मोना ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई मिसाल कायम की है. उनकी जिंदगी में पति की एक महत्वपूर्ण सलाह टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दिया. महज ढाई साल की प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसने उन्हें चर्चा का विषय बना दिया. उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प से कम समय में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. मोना की प्रेरक कहानी युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए मेहनत और आत्मविश्वास का मजबूत संदेश देती है.

Success Story: सीकर की पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है. सर्बिया में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में महिलाओं की आर-2 (10 मीटर) एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है. मोना ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती. उनके लिए यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और उन तनों का जवाब है, जो उन्हें कमजोर समझते थे.,

मोना अग्रवाल की खेल यात्रा भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वर्ष 2016 में उन्होंने सोशल मीडिया पर पैरा खेलों के बारे में जानकारी देखी और वहीं से उनके भीतर खेलों में कुछ बड़ा करने का सपना जागा. उन्होंने शुरुआत शॉटपुट, जेवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो से की. शुरुआती दौर में ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. यहीं से उनके जीवन की नई दिशा तय की और उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने पर जोर दिया.

उन्होंने भारत की महिला सिटिंग वॉलीबॉल टीम की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर दिव्यांग लड़कियों को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है. उन्होंने टीम तैयार करने में सक्रिय योगदान दिया ताकि अधिक से अधिक बेटियां खेलों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें. उनकी वजह से आज अनेको दिव्यांग लड़कियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों पर अपना प्रदर्शन दिखाने का मौसम मिला है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

मोना अग्रवाल का साल 2018 में विवाह हो गया. लेकिन, इसके बाद भी उन्होंने अपने सपनों को रुकने नहीं दिया. उन्होंने 2021 में पावरलिफ्टिंग में भी हाथ आजमाया. कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीता. हालांकि गर्भावस्था के कारण वह नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकीं. यह उनके लिए कठिन समय था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. पति रविंद्र चौधरी की सलाह पर उन्होंने शूटिंग को अपना लक्ष्य बनाया और उसी निर्णय ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया.

सिर्फ ढाई साल की प्रैक्टिस के बाद मोना ने पैरालिंपिक का कोटा हासिल कर लिया. इसके बाद उन्होंने क्रोएशिया, दक्षिण कोरिया और नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड कप चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. वर्ष 2024 के पेरिस पैरालिंपिक में 10 मीटर एयर राइफल एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के बाद भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया. 2025 में दक्षिण कोरिया के चांगवान वर्ल्ड कप में रजत और अब सर्बिया में कांस्य पदक जीता.

मोना का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है. उनके पति रविंद्र चौधरी राजस्थान व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के कप्तान रह चुके हैं, लेकिन कोरोना काल में सड़क दुर्घटना के कारण ब्रेन इंजरी का शिकार हो गए और लंबे समय से स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. दो बच्चों की जिम्मेदारी के बीच मोना का खेल जारी रह सके, इसके लिए उनकी सास बच्चों की देखभाल करती हैं. वहीं मोना जयपुर सचिवालय में एलडीसी के पद पर कार्यरत रहते हुए नौकरी और खेल दोनों जिम्मेदारियां को निभा रही हैं.

मूल रूप से मोना सीकर के रानी सती रोड क्षेत्र की रहने वाली है. लेकिन, अभी जयपुर वह जयपुर रहती है. मोना अग्रवाल आज लाखों युवाओं के लिए उम्मीद का दूसरा नाम बन चुकी हैं. उन्होंने यह साबित किया है कि सफलता केवल परिस्थितियों से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत से मिलती है. मोना का कहना है कि जीत के बाद जब विदेशी धरती पर भारत का तिरंगा लहराता है तो बहुत अच्छा लगता है. इसी एक पल के लिए वह मेहनत करती है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||