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Who Was Suneil Anand: देव आनंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद अब इस दुनिया में नहीं रहे.विदेश में जन्मे सुनील ने पिता की राह पर चलते हुए फिल्मों में कदम रखा, लेकिन कभी लाइमलाइट का हिस्सा नहीं बने. उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा के एक प्रतिष्ठित परिवार का एक और अहम अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया. क्या आप जानते कि आखिर कौन थे सुनील आनंद और क्या करते थे?

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के सदाबहार एक्टर और फिल्म निर्माता देव आनंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद भी दुनिया से अलविदा कह गए. 70 साल की उम्र में उनका निधन हो गया है. 26 जुलाई 2026 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ. उनके निधन की पुष्टि उनकी भतीजी जीना नारंग ने की. देवानंद के कई किस्से-कहानी आपने सुनी होगीं लेकिन सुनील आनंद के बारे लोग बहुत कम जानते हैं.

स्विट्जरलैंड में हुआ था जन्म: सुनील आनंद का जन्म 30 जून 1956 को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में हुआ था. उस समय उनके माता-पिता कारलोवी वैरी फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने के लिए जा रहे थे. वह देवानंद और एक्ट्रेस कल्पना कार्तिक के इकलौते बेटे थे.

विदेशी विश्वविद्यालय से पढ़ाई: सिनेमाई परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने अमेरिका की अमेरिकन यूनिवर्सिटी (वाशिंगटन डीसी) से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की थी.

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पिता संग ‘आनंद और आनंद’ से डेब्यू: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सुनील ने बॉलीवुड का रुख किया. साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म ‘आनंद और आनंद’ से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. इस फिल्म का निर्देशन उनके पिता देवानंद ने किया था. इसमें पिता-पुत्र दोनों ने साथ काम किया था.

मार्शल आर्ट्स में महारत: सुनील आनंद का रुख मार्शल आर्ट्स की ओर भी था. उन्होंने हांगकांग जाकर ‘विंग चुन’ (Wing Tsun) मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली थी.

बतौर निर्देशक शुरुआत: अपनी मार्शल आर्ट्स की कुशलता का उपयोग करते हुए उन्होंने साल 2001 में फिल्म ‘मास्टर’ बनाई. इस फिल्म के जरिए उन्होंने बतौर निर्देशक अपना डेब्यू किया था और इसमें खुद अभिनय भी किया था.

‘नवकेतन फिल्म्स’ की जिम्मेदारी: लीड एक्टर उन्हें बॉक्स ऑफिस पर अपने पिता जैसा स्टारडम नहीं मिला. तो उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली और पारिवारिक बैनर ‘नवकेतन फिल्म्स’ की जिम्मेदारी संभाल ली.

कान्स में ‘गाइड’ का ऐतिहासिक प्रदर्शन: सुनील आनंद ने अपने पिता के सिनेमाई काम को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. साल 2008 में जब देव आनंद की क्लासिक फिल्म ‘गाइड’ को कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया, तो इसकी पूरी व्यवस्था और समन्वय सुनील आनंद ने ही संभाला था.

हॉलीवुड प्रोजेक्ट और पिता को श्रद्धांजलि: अपने आखिरी सालों में वह एक अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी प्रोजेक्ट ‘वैगेटर मिक्सर’ पर काम कर रहे थे. साथ ही वह अपने पिता देव आनंद के जीवन और विरासत को समर्पित एक बड़ी फिल्म बनाने का प्रयास भी कर रहे थे.

लो-प्रोफाइल और निजी जीवन: देव आनंद का निधन भी दिसंबर 2011 में लंदन में ही हुआ था. संयोग देखिए लंदन शहर में ही देवानंद ने अंतिम सांस ली थी, उसी शहर में 15 साल बाद उनके बेटे सुनील आनंद का भी निधन हो गया. पिता के निधन के बाद सुनील ने अपने जीवन को पूरी तरह से प्राइवेट रखा और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का काम करते रहे.उनके जाने से भारतीय सिनेमा के एक ऐतिहासिक दौर का अध्याय समाप्त हो गया है.

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