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  • भू-माफियाओं, अवैध कब्जों और भ्रष्ट तंत्र पर किया कड़ा प्रहार, गरीबों और किसानों के अधिकारों को मिली नई मजबूत, महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में जवाबदेह हुआ प्रशासन
  • जनसुनवाई से विकास परियोजनाओं तक हर मोर्चे पर सक्रिय निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही बनी प्रशासन की पहचान
  • जनविश्वास जीतने वाला प्रशासनिक मॉडल, जिसने अधिकारियों की जवाबदेही को बनाया सर्वोच्च प्राथमिकता
  • गाजियाबाद व गोरखपुर में छोड़ी विकास की छाप, कुशीनगर में सुशासन की मिसाल बने युवा IAS महेंद्र सिंह तंवर

उदय भूमि संवाददाता
कुशीनगर। जिले के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनहित के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, गरीबों के अधिकारों की रक्षा, किसानों के हित और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय रही है। विभिन्न बैठकों में उनका स्पष्ट संदेश रहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भू-माफियाओं के खिलाफ सबसे सख्त अभियान
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कार्यभार संभालने के बाद सरकारी भूमि, ग्राम समाज की जमीन और गरीबों की पट्टा भूमि पर अवैध कब्जों को गंभीर चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने जिला एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स को सक्रिय करते हुए सभी उप जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध कब्जों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए। कई मामलों में प्रशासन ने कथित भू-माफियाओं को चिन्हित कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। प्रशासन का उद्देश्य केवल अवैध कब्जे हटाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना भी रहा। इस अभियान से जिले में यह संदेश गया कि सरकारी और गरीबों की जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के प्रति प्रशासन किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।

दलित, वंचित और मुसहर परिवारों की जमीन की सुरक्षा पर विशेष जोर
जिले के अनुसूचित जाति, जनजाति और मुसहर परिवारों की पट्टा भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन कर निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पात्र परिवारों को उनकी भूमि पर वास्तविक कब्जा दिलाने की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाए। यह कदम सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

किसानों के हित में पारदर्शी व्यवस्था
किसान दिवस की बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आवश्यक होगी। उनका उद्देश्य पात्र किसानों का सही रिकॉर्ड तैयार करना और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाना था।उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण कराया जाए तथा किसी भी पात्र किसान को योजना के लाभ से वंचित न रहने दिया जाए।

राजस्व प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि विवादों का त्वरित निस्तारण किया जाए, सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए तथा गरीब और पात्र लोगों को समय पर राजस्व संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकारियों के कार्यों की निगरानी भी की।

विकास योजनाओं की लगातार निगरानी
जिले में संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

कानून का राज स्थापित करने का संदेश
अपने कार्यकाल के दौरान जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर का प्रशासनिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई दिया—कानून से ऊपर कोई नहीं। चाहे मामला भू-माफियाओं पर कार्रवाई का हो, सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता का, गरीबों के अधिकारों की रक्षा का या अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का, उन्होंने प्रत्येक स्तर पर नियमों के पालन पर जोर दिया।

जनता में बनी सक्रिय प्रशासन की छवि
प्रशासनिक बैठकों, जनसुनवाई और निरीक्षणों के माध्यम से जिलाधिकारी लगातार अधिकारियों को जनहित के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते रहे। उनके कार्यकाल में लिए गए कई निर्णयों की जिले में व्यापक चर्चा हुई और इन कदमों ने प्रशासन की कार्यशैली को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

जनता की शिकायतों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता
संपूर्ण समाधान दिवस और तहसील दिवस की बैठकों में जिलाधिकारी लगातार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते रहे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कई बार कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही, अनावश्यक देरी या औपचारिकता स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी कार्यालयों से दलाली खत्म करने की पहल
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका दलालों को संरक्षण देने में पाई गई तो उसके विरुद्ध भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों को बिना किसी बिचौलिए के समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।

गोरखपुर विकास प्राधिकरण में बदलाव की नींव रख गए महेंद्र सिंह तंवर
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर का कार्यकाल प्रशासनिक सख्ती, पारदर्शिता और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए याद किया जाता है। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने लंबित योजनाओं की नियमित समीक्षा, अवैध निमार्णों पर कार्रवाई और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण फैसला प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (ढटव) की स्थापना की पहल रही। इस पहल के साथ गोरखपुर विकास प्राधिकरण प्रदेश का ऐसा पहला विकास प्राधिकरण बनने की दिशा में बढ़ा, जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से परियोजनाओं की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और तय समय सीमा में कार्य पूरा कराने की व्यवस्था विकसित की गई। इससे विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने और जवाबदेही तय करने में मदद मिली। इसके अलावा तंवर ने ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देने, नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और प्राधिकरण की योजनाओं को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक अनुशासन और समयबद्ध कार्य संस्कृति को प्राथमिकता मिली, जिससे जीडीए की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनी।

यादगार रहा है नगर निगम गाजियाबाद के आयुक्त का कार्यकाल
महेंद्र सिंह तंवर ने गाजियाबाद नगर निगम के आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शहर के समग्र विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में नगर निगम ने स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमित सफाई अभियान, कचरा संग्रहण प्रणाली में सुधार तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए। शहर की सड़कों, नालों और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव पर विशेष बल दिया गया, जिससे नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएँ प्राप्त हुईं। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली में तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक सक्रिय बनाया, जिससे आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हो सका। अवैध निमार्णों पर कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने के अभियान तथा राजस्व संग्रह में सुधार जैसे प्रशासनिक निर्णयों ने नगर निगम की कार्यक्षमता को मजबूत किया।
महेंद्र सिंह तंवर ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वृक्षारोपण, स्वच्छता जागरूकता और हरित विकास से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया। उनके कार्यकाल में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया। उनके नेतृत्व को एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देखा गया जिसने जनहित को प्राथमिकता देते हुए गाजियाबाद नगर निगम की सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया।

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