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गन्ने की खेती में मुनाफे और लागत की बात की जाए तो,​एक बीघा गन्ने की खेती में बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और कटाई मिलाकर लगभग 10,000 से 12,000 रुपये तक का खर्च आता है. अगर गन्ने की सही देखरेख की जाए, तो एक बीघे में लगभग 80 से 100 क्विंटल तक गन्ने पैदा हो सकती हैं. इस हिसाब से बाजार या मिल के रेट के हिसाब से इसे बेचने पर किसान को आराम से 30,000 से 35,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है. यानी लागत निकालकर प्रति बीघा करीब 20,000 से 25,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता है और जो किसान बड़े पैमाने पर खेती करते हैं उनका मुनाफा भी अधिक होता है.

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बहराइच: ​गन्ने की फसल की अच्छा पैदावार और मुनाफा लेने के लिए बुवाई के बाद उसकी सही देखभाल करना बेहद जरूरी है. बहराइच जिले के टिकुरी गांव के रहने वाले किसान दुर्गेश कुमार सिंह पिछले 10 सालों से गन्ने की खेती कर रहे हैं. लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने गन्ने की बुवाई, देखभाल, लागत-मुनाफा और बीमारियों से बचाव को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं.​

गन्ने की बुवाई के बाद कैसे करें देखभाल?

​कृषि के जानकार वैज्ञानिक और किसान गन्ने की खेती को लेकर बताते है। बुवाई करने के बाद खेत में नमी का होना बहुत जरूरी होता है. जब जमाव शुरू हो जाए, तो समय समय पर हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि पौधों का विकास तेजी से हो. इसके अलावा खेत में खरपतवार न उगने दें. क्योंकि इससे मिट्टी की ताकत खींच बट जाती है. इसके अलावा समय पर निराई-गुड़ाई करते रहे ऐसा करने से जड़ों को हवा मिलती है और गन्ना मजबूत होता है.

गन्ने की खेती में मुनाफे और लागत की बात की जाए तो,​एक बीघा गन्ने की खेती में बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और कटाई मिलाकर लगभग 10,000 से 12,000 रुपये तक का खर्च आता है. अगर गन्ने की सही देखरेख की जाए, तो एक बीघे में लगभग 80 से 100 क्विंटल तक गन्ने पैदा हो सकती हैं. इस हिसाब से बाजार या मिल के रेट के हिसाब से इसे बेचने पर किसान को आराम से 30,000 से 35,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है. यानी लागत निकालकर प्रति बीघा करीब 20,000 से 25,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता है और जो किसान बड़े पैमाने पर खेती करते हैं उनका मुनाफा भी अधिक होता है.

गन्ने में लगने वाले प्रमुख रोग और उनसे बचाव का तरीका

गन्ने की फसल में मुख्य रूप से लाल सड़न रोग और तना छेदक सूंडी का असर ज्यादा देखने को मिलता है. लाल सड़न बीमारी में गन्ने का तना अंदर से लाल हो जाता है और पौधा सूखने लगता है. इससे बचाव के लिए हमेशा बीमारी-रहित स्वस्थ बीज ही बोएं और बुवाई से पहले बीज का शोधन जरूर करना चाहिए. गन्ने के शुरुआती दौर में कीटों का हमला रोकने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से सही कीटनाशक दवा का छिड़काव समय-समय पर करते रहना चाहिए. अगर इस विषय में आप चाहे तो कृषि विज्ञान केंद्र से भी जानकारी ले सकते हैं.

​जानकार बताते है,बरसात के मौसम में अक्सर गन्ने के खेतों में जलभराव की समस्या हो जाती है. अगर खेत में ज्यादा दिनों तक पानी रुका रहे, तो गन्ने की जड़ें गलने लगती हैं और फसल कमजोर पड़ जाती है. पानी भर जाने पर सबसे पहले खेत से जल निकासी की तुरंत व्यवस्था करनी चाहिए. बारिश के बाद जैसे ही धूप निकले और पानी बाहर हो जाए, तो जड़ों के पास हल्की यूरिया या जिंक का छिड़काव करें ताकि फसल में फिर से हरियाली आ सके. इन बातों का ध्यान रख कर गन्ने की सफल खेती हमारे किसान भाई बड़े आराम से कर सकते है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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